Wednesday, February 24, 2021

Atishay Kshetr Ajayagadh Madhya Pradesh

 श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़,पन्ना (मध्यप्रदेश)
Shri Digambar Jain Atishay Area, Ajaygarh, Panna (Madhya Pradesh) 


 अजयगढ़ मप्र के पन्ना जिले से 32 किमी दूर स्थित है। यह खजुराहो से चार घंटे की ड्राइव भी है, लेकिन सड़कें बहुत खराब और उबड़-खाबड़ हैं। जयपाल पहाड़ी की चोटी पर बना मंदिर 9 वीं शताब्दी में चंदेल वंश द्वारा बनाया गया था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब यह मंदिर अपनी महिमा खो चुका है। पेड़ हर तरफ बढ़ने लगे हैं और किला अपनी उम्र से काफी पुराना लगता है। किले के मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सौ से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

मंदिर के अंदर तीर्थंकर शांतिनाथ की 12 फीट ऊंची मूर्ति है। इसके साथ ही, भगवान कुंथुनाथ और अरनाथ की मूर्तियाँ भी हैं। यहां एक सहस्त्रकूट जिनालय भी बनाया गया है। सभी में बिखरी हुई जैन मूर्तियों के टूटे हुए टुकड़े देख सकते हैं। यह स्थान अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और उन्होंने यहां की जा रही पूजा को रोक दिया है, केवल दर्शन की अनुमति है। दो मंदिरों का निर्माण कार्य चल रहा है। 

Map


आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - सतना - 100 कि.मी.
बसस्टेण्ड पहुँचने का सरलतम मार्ग - अजयगढ़ पन्ना अथवा बाँदा से सड़क मार्ग द्वारा
निकटतम प्रमुख नगर - पन्ना - 32 कि.मी.

 
प्रबन्ध व्यवस्था
संस्था - दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी, अजयगढ़
अध्यक्ष - श्री राजकुमारजी जैन (09981091591)
मंत्री - श्री कोमलचन्द जैन (09179320609) श्री सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498)
प्रबन्धक - सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498) 

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
खजुराहो-50 कि.मी.,
द्रोणागिरि, नैनागिरि,
श्रेयांसगिरि-100 कि.मी.,
चित्रकूट - 100 कि.मी.,
कालिंजर-30 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - नहीं
भोजनशाला - नहीं
औषधालय - है (शासकीय)
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - है।

नाम एवं पता -
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़, पोस्ट/तहसील - अजयगढ़,
जिला - पन्ना (मध्यप्रदेश) पिन - 488220
टेलीफोन - 07730 - 278244, मो.: 094250-25925

Tuesday, February 23, 2021

Bundelkhand's Jain Tirth

बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी (टीकमगढ़) मध्य प्रदेश

Bundelkhand's Jain Tirth - Shri Digambar Jain Sidhha Aharji, Tikamgarh (M.P.)

आज से लगभग 133 वर्ष पूर्व सन 1884 (वि.सं. 1941) तक अहार जी क्षेत्र एक विशाल रेत के टीले में तब्दील था। टीकमगढ़ जिले के नारायणपुर ग्राम के एक जैन व्यापारी श्री सबदल बजाज जी का घोड़ा खो गया था,जिसे खोजते हुये बे उस टीले पर पहुंचे। टीले पर खड़े होकर घो‌ड़े के लिये चारों ओर नजर दौड़ाई, तभी बहां उन्होने कुछ बच्चों को खेलते हुये देखा। उन से घोड़े के बारे में पूंछा। वहा टीले पर बच्चे रेत का खेल खेल रहे थे। वहा  पर कुछ छेद (छिद्र)बने हुये थे, जिनमें बच्चे आवाज लगाते और उन्हें बदले में प्रतिध्वनि सुनाई देती। श्री बजाज जी ने भी ऐसा करके देखा और उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि इसके नीचे कुछ विशेष रचना मंदिर या मठ आदि हो सकता है। वे पास के ग्राम पठा गये और वहां पर जैन विद्वान पं. भगवानदास जी वैद्य से इस बारे में चर्चा की। कुछ समय बाद दौनों लोग पुन: टीले पर आये और स्थिति का जायजा लिया।
दोनों महानुभावों ने मजदूरों को लेकर खुदाई प्रारम्भ कराईतो कुछ ही दूरी पर मंदिर का दरवाजा मिल गया। भीतर जाकर देखा तो भगवान शांतिनाथ एवं भगवान श्री कुंथुनाथ जी की दो खड़्गाीसन खण्डित प्रतिमायें खड़ी थीं। पुन: खुदाई प्रारम्भ हुई और एक विशाल मंदिर जो कि रेत के टीले में दबा हुआ था, धीरे धीरे प्रकट हो गया। क्षेत्र के दक्षिण दिशा में स्थित पर्वत पर सैकड़ों मूर्तियां खण्डित अवस्था में पड़ी हुई थींजिन्हें एकत्रित करके संग्रहालय में लाया गया। अहार क्षेत्र के इस संग्रहालय में ग्यारहवीं शताब्दी से पंद्रहवीं शताब्दी तक की सैकड़ों मूर्तियां विद्यमान हैं। 
प्रसिद्ध क्षेत्र आहार जी सिद्ध क्षेत्र के साथ अतिशय क्षेत्र भी है, यहां पाणाशाह नामक प्रसिद्ध सृष्टि प्रवर के रांगा से भ्ररे बोरे चांदी में परिवर्तित हो गये थे। जब एक माह की व्रत के बाद, एक तपस्वी संत को यहां एक यक्षिणी द्वारा उपसर्ग किये जाने पर आहार (भोजन) मिला तभी से इस जगह का नाम आहारजी के रूप में प्रसिद्ध हो गया ! काफी इतने सारे लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं। पूर्व में यहां के शासक मदन बर्मनदेव के होने से उन्हीं के नाम से मदन सागर सरोवर वर्तमान में स्थित है।
सिद्ध क्षेत्र आहार जी में मूलनायक शांतिनाथ भगवान का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में देशी पाषाण की अखंडशिला से निर्मित भगवान शांतिनाथ की अत्यंत मनोहारी परम आभामंडल से संपन्न 21 फुट की कलात्मक प्रतिमा विराजमान है।  भगवान कुंथुनाथ की लम्बाई 11 फीट है तथा अरहनाथ की नवीन मूर्ति जो 1958 के गजरथ में स्थापित की गयी थी बह भी 11 फीट (सफेद संगमरमर) की है। शांतिनाथ तथा कुंथुनाथ की प्रतिमाओंपर रत्नों की पालिश है। 
 
Map
 
 
क्षेत्र पर संख्या
मन्दिरों की संख्या - 08, 
मानस्तम्भ-2, 
चरणछतरी-6 (पंचपहाड़ी पर)
 
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - 
पपौराजी - 22 कि.मी., द्रोणगिरि - 56 कि.मी., खजुराहो - 125 कि.मी., श्री फलहौड़ी - बड़ागाँव-30 कि.मी., ओरछा-110 कि.मी., कुंडेश्वर - 30 कि.मी.
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास - 
कमरे (अटैच बाथरूम) - 22, 
कमरे (बिना बाथरूम) - 150 
हाल - 3 (यात्री क्षमता - 200), 
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000. 
ए.सी.कमरे-02 , डीलक्स कमरे-14
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है (आयुर्वेदिक)
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - है (संस्कृत विद्यालय, एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। छात्रावास, व्रती आश्रम)

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - मऊरानीपुर-62 कि.मी., ललितपुर-83 कि.मी., झाँसी-120 कि.मी.
बस स्टेण्ड - बलदेवगढ़ - 10 कि.मी., टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग टीकमगढ़ से अहारजी
निकटतम प्रमुख नगर - टीकमगढ़ - 25 कि.मी.


नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, अहारजी तहसील - बल्देवगढ़, 
जिला - टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) पिन - 472 001
टेलीफोन - 07683-298932, 09926610184, 
नरेन्द्रकुमार जैन-09425141593 
 
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Monday, February 22, 2021

Banediyaji jain mandir indore

 अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश


जी हा दोस्तो क्या आप ने सुना है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर के बारे में तो सही सुना है कहा जाता है की यह उड़ता हुआ आया था. पूरे भारत में शायद ही ऐसा मंदिर होगा जो उड़ कर आया होगा यह एक मात्र मंदिर है बनेडिया जी का जिसकी कोई नीब नही है. इससे यह प्रमाणित होता है की मंदिर सही में उड़ केर आया था.
यह मंदिर  इंदौर से मात्र 40 km और  देपालपुर से 4 km पर है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर ।

श्री बनडियाजी अथियाक्षेत्र लगभग आठ सौ वर्ष पुराना है। यह एक विशाल तालाब के किनारे पर स्थित है। तालाब का एक सिरा देपालपुर को छूता है। यह माना जाता है कि अतीत में देपालपुर से बनाडिया तक फैला एक बड़ा शहर रहा होगा। मूलनायक प्रतिमा भगवान अजितनाथ की अति प्राचीन, अतिशय युक्त व मनोमुग्धकारी है। मंदिर में सैकड़ों प्राचीन प्रतिमाएँ विराजमानहैं। किंवदन्ती है कि इस जैन मन्दिर को महात्माओं द्वारा आकाश मार्ग से पृथ्वी पर उतारा गया है।

इस मंदिर के बारे में लोकप्रिय बात यह है कि इस मंदिर की कोई नींव नहीं है और अभी भी यह सैकड़ों वर्षों से यहां खड़ा है और कई प्राकृतिक आपदाओं को झेल चुका है। यह एकमात्र आतिशाक्षेत्र है, जहां मंदिर भारत में नींव के बिना है। भगवान अजितनाथ की मूर्ति से संबंधित चमत्कारों के बारे में कई लोकप्रिय कहानियां हैं। केवल जैन ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के हजारों लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करने आते हैं। वार्षिक मेले के अवसर पर हजारों की संख्या में पुरुष और महिलाएँ यहाँ इकट्ठा होते हैं और बड़ी धार्मिक श्रद्धा और भक्ति दिखाते हैं। 

Map

 

विशेष जानकारी :
देपालपुर-बनेड़िया जंक्शन पर श्री दि. जैन सोशल ग्रुप, इन्दौर नगर व ट्रस्ट के सहयोग से विशाल अजितनाथ द्वार यात्रियों की जानकारी हेतु निर्मित किया गया है।
समीपवर्तीतीर्थक्षेत्र गोम्मटगिरि - 30 कि.मी.,
सिद्धवरकूट - 125 कि.मी.
मक्सीजी - 95 कि.मी.,
सूमठा -8 कि.मी.

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - गौतमपुरा रोड़ - 21 कि.मी., इन्दौर - 45 कि.मी.
बस स्टेण्ड - देपालपुर से बनेड़ियाजी - 4 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर से बनेड़िया सड़क मार्ग, उज्जैन, धार, गौतमपुरा से सड़क मार्ग, बस, टेम्पो, जीप सुविधा उपलब्ध
निकटतम प्रमुख नगर - इन्दौर - 45 कि.मी., देपालपुर - 4 कि.मी. 

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 10, कमरे
(बिना बाथरूम) - 20 (
6 सुसज्जित डीलक्स कमरे)
हाल - 1 (यात्री क्षमता - 100+25),
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 300.
भोजनशाला - नियमित, सशुल्क
अन्य - संतसदन
औषधालय -   है |
पुस्तकालय - पुस्तके - 200
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। 

अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश
नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, बनेड़ियाजी ग्राम - बनेड़िया,
तहसील - देपालपुर, जिला - इन्दौर (मध्यप्रदेश) पिन - 453115
टेलीफोन - 098937-13839 

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Sunday, February 21, 2021

Manatungagiri Tirthakshetra - श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 


भारत भूमि पर एक ऐसा अतिशय तीर्थ क्षेत्र है जो कि जैन दर्शन के भक्तामर स्त्रोत की रचना स्थली के स्मृति रूप मानतुंगगिरी के नाम से जाना जाता है. मानतुंगगिरी यथानाम एक ऊंची पहाड़ी पर ऐसे शांत परिवेश में निर्मित है जहां पहुंचकर भगवान आदिनाथ की विशालतम खड्गासन  प्रतिमा एवं मानतुंगचार्य की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन मात्र से हृदय को सहज ही अवर्णनीय आनंद की अनुभूति होती है. 

इस जगह की एक बहुत ही प्रचलित कथा है. कहा जाता है उस समय मालवा की भूमि पर धार नगरी में राजा भोज का राज्य था.  राजा ने किसी आवेश में आकर आचार्य मानतुंग स्वामी को ४८ कोठरियों में (बन्दीगृह में) बन्द कर दिया था. तब आचार्य ने भगवान आदिनाथ की अटूट भक्ति की और ४८ काव्यों की रचना की जिसके फलसरूप उस बन्दीगृह के ४८ ताले स्वयमेव टूट गए, भक्ति का ऐसा अदभुत चमत्कार देखकर राजा भोज को भी मुनिराज के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा। यह स्तोत्र आज भक्तामर स्तोत्र के नाम प्रसिद्ध हुआ है।

धार (मध्य प्रदेश) से मात्र 3 KM दूर इंदौर एवं अहमदाबाद पर एक पावन स्थल जोकि अतिशय तीर्थ क्षेत्र मानतुंगगिरी के नाम से विश्व प्रसिद्ध है. भक्तामर काव्यों की रचना स्थली के स्मृति रूप एकमात्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र जो की समादिस्थ गुजरात संत श्री परम पूज्य आचार्य श्री भरत सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से विकास गति की ओर अग्रसर है. आचार्य श्री कि आचार्य दीक्षा स्थली की स्मृति रूप यह क्षेत्र हे. गुरुदेव वात्सल्य शिरोमणि रहे मानवकुंज रहे हो आज आपके और हमारे बीच नहीं हैं उसके बावजूद यहा जा काम प्रगति पर है. आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज की प्रेरणा से यहां काम आगे बाद रहा है. 

Map

  

 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ  
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 12,(बिना बाथरूम) - 7 हाल -1, गेस्ट हाउस - ४ यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 100.
भोजनशाला - है सशुल्क, अनुरोध पर - संत सदन एवं प्रवचन हॉल
औषधालय - निर्माणाधीन
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - नहीं ।
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - नहीं

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - इन्दौर-67 कि.मी., रतलाम-80 कि.मी., मेघनगर -110 कि.मी.
बस स्टेण्ड - धार - 3 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर - अहमदाबाद तिरला रोड़ (आमखेड़ा), धार से बसें उपलबध रहती हैं।
निकटतम प्रमुख नगर - धार - 3 कि.मी.

क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या :
3-पूर्ण विकसित मार्बलीकरण एवं कांच का कार्य
क्षेत्र पर पहाड़ : है। 108 सीढ़ियाँ है।

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
चमत्कारिक क्षेत्र आहूजी - 13 कि.मी.,
बावनगजा - 110 कि.मी.,
गोम्मटगिरि-64 कि.मी.,
बनेड़िया-70 कि.मी.,
अतिशय क्षेत्र-कागदीपुरा-22 कि.मी.

अन्य दर्शनीय एवं एतिहासिक स्थल
धार किला,
भोजशाला,
फड़के स्टूडियो,
पुरातत्त्व संग्रहालय,
दि. जैन शांतिनाथ मंदिर,
मोहनखेड़ा (श्वे.जैन) तीर्थक्षेत्र (राजगढ़) - 45 कि.मी.
  

नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा
जिला - धार (मध्यप्रदेश) पिन - 454001
टेलीफोन - 07292 - 233400, 09424580671


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Wednesday, February 17, 2021

Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore

 Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore


इंदौर मध्य प्रदेश का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है और दिगंबर जैनियों का मुख्य केंद्र भी है। शहर में कई जैन संस्थान और मंदिर हैं। 

कांच मंदिर, प्रसिद्ध जैन मंदिर में से एक मंदिर है. इसे सेठ हुकुमचंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | यह मंदिर सर सेठ हुकुमचंद द्वारा बनवाया गया था | श्री विक्रम सवंत १९७८ मिति आषाढ़ सुदी ७ सोमवार सन १९२१ में इसमें मूर्ति स्थापना कि गयी | ये मंदिर न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं, बल्कि उनकी वास्तुकला, बनावट और सुंदरता के लिए भी जाने जाता हैं।

यह मंदिर सफेद पत्‍थर से बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण हवेली के रूप में किया गया था. इसे कांच का मंदिर इस लिए कहा जाता है क्योकि मंदिर का अंदरूनी हिस्‍सा पूरी तरह कांच के दर्पण और टुकड़े की नकाशी से निर्मित किया है। मंदिर के अंदर हर जगह जैसे दीवारें, छत, फर्श, खंभे और दरवाज़े पूरी तरह से कांच से जड़े हैं। 

Map

इस मंदिर में एक विशेष ग्लास कक्ष है. इस मंदिर में तीन मूर्तियाँ स्थापित हैं, मध्य में श्री शांतिनाथ भगवान व उनके दाहिने हाथ कि और श्री चंद्रप्रभा भगवान एवं बायीं और आदिनाथ भगवान विराजे है. जो इन मूर्तियों की छवियों को अनिश्चित संख्या में गुणा करती हैं। इस मंदिर में जो कांच के दर्पण और रंग बिरंगे टुकड़े की नकाशी है, और उससे बने सुंदर चित्रों को देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से यहां आते हैं। इसके दरवाजे लकड़ी के बने हुए है और उस पर चाँदी कि परत लगाई गयी है | इनकी दीवारों पर की गयी कांच की नक्काशी में जैन धर्म कि कहानिया और तीर्थ स्थल के दृश्य बनाये गये है. जो मंदिर के अंदरूनी हिस्से को शानदार बनता है.

यह मंदिर सिटी के मध्य में होने की वजह से यहा सभी जैन त्योहार बहुत धूम धाम से बनाया जाता है.  जब त्योहार होते है तो यह पर विधान होता है, सुगंध दशमी के दिन, विशेष मंडलों का निर्माण बहुरंगी चावल-पाउडर का उपयोग करके किया जाता है, रंग रंग कार्यक्रम होते है. त्योहारों पर जैन धर्म का महत्व भी समझाय जाता है युवा पीढ़ी को.


मंदिर सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक यह मंदिर आम जनता के लिए खुला रहता है |

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - इन्दौर - 3 km.
बस स्टेण्ड - इन्दौर - 3.3 km.
एयरपोर्ट - इन्दौर - 8.6 km

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र

मानतुंगगिरि-13 कि.मी.,
बनेड़िया-75 कि.मी.,
बावनगजा (चूलगिरि)-122 कि.मी.
कागदीपुरा-38 कि.मी.,
आहू - 65 कि.मी
गोमटगिरि - 12 कि.मी
पुष्पगिरी - 65 कि.मी
मक्सी - 72 कि.मी

तीर्थ स्थान का विवरण

कांच मंदिर,
इटवरिया बाजार,
हुकुमचंद मार्ग,
इंदौर, मध्य प्रदेश
452002

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Tuesday, February 16, 2021

Atishay Kshetra Aahu, Dhar

Shree Sankat Mochan Bhagwan Parshwanath Digambar Jain Atishay Kshetra Aahu, Dhar, Madhya Pradesh

इन्दौर नगर से ६५ कि.मी. एवं धार नगर से १३ कि.मी. दूर पश्चिम दिशा में श्री संकटमोचन आहू पार्श्वनाथ दि.जैन अतिशय क्षेत्र, आहू में स्थित है। इन्दौर-धार-अहमदाबाद मार्ग से जुड़ा होने के कारण यहाँ आवागमन सुलभ है। 

इस मदिर की एक बहुत ही प्रचलित कथा है. कहा जाता है उस समय मालवा की भूमि पर धार नगरी में राजा भोज का राज्य था.  राजा ने किसी आवेश में आकर आचार्य मानतुंग स्वामी को ४८ कोठरियों में (बन्दीगृह में) बन्द कर दिया था. तब आचार्य ने भगवान आदिनाथ की अटूट भक्ति की और ४८ काव्यों की रचना की जिसके फलसरूप उस बन्दीगृह के ४८ ताले स्वयमेव टूट गए, भक्ति का ऐसा अदभुत चमत्कार देखकर राजा भोज को भी मुनिराज के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा। यह स्तोत्र आज भक्तामर स्तोत्र के नाम प्रसिद्ध हुआ है।

इस प्राचीन अतिशय क्षेत्र पर भगवान की एक फुट ७ इंच पार्श्वनाथ की अवगाहना प्रमाण चमत्कारिक
प्रतिमा
500 वर्ष पुरानी है। लोक व्यवहार में इसके चमत्कारिक प्रसंग कहे और सुने जाते हैं। खा जाता है की पहले यह पर चैत्यालय था किन्तु लगभग 150 वर्ष पूर्व चैत्यालय को मन्दिर में रूपान्तरित किया गया। संतों की प्रेरणा से मन्दिर जीर्णोद्धार एवं क्षेत्र का विकास कार्य प्रगति पर है। 

Map 

   

वार्षिक मेला

प्रतिवर्ष पौष वदी ग्यारस के दिन यहाँ वार्षिक मेला लगता है, जिसमें हाथी, घोड़े , बग्घियाँ आदि रहती हैं। भारतवर्ष के कई भागों से यात्रीगण प्रतिदिन यहाँ अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने आते रहते हैं।

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

क्षेत्र पर जयसागर धर्मशाला है। ३ कमरे और १ हाल भी है। भोजनशाला आदि की सुविधा नहीं है। 

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - इन्दौर - 65 कि.मी.
बस स्टेण्ड - धार - 13 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग व्हाया धार
निकटतम प्रमुख नगर - धार - 13 कि.मी.

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र 

मानतुंगगिरि-13 कि.मी.,
बनेड़िया-75 कि.मी.,
बावनगजा (चूलगिरि)-122 कि.मी.
कागदीपुरा-38 कि.मी.,
मांडव-52 कि.मी.

नाम एवं पता 

श्री संकटमोचन आहू पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, आहूजी (धार)
ग्राम - आहू, जिला - धार (मध्यप्रदेश)
पिन - 454001
टेलीफोन - 07292-232370, 098260 65200

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Sidwarkut Digamber Jain, Siddha Khetra

 सिद्धवर कूट दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र Sidhwarkut Digamber Jain, Siddha Khetra 

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में सिद्धवरकुट जैन धर्मावलंबियों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह तीर्थस्थल ओंकारेश्वर से एक किमी दूर पर है। यहा दो नदियों का संगम है नर्मदा और कावेरी नदी का जिस के तट से लगा हुआ अति प्राचीन दिगम्बर जैन सिद्व क्षेत्र सिद्ववरकूट स्थित है ।

सिद्धवरकुट में कुछ पुराने और पुनर्निर्मित और कुछ नए जैन मंदिरों है। पुराने मंदिर में पाए गए कुछ चित्र 1488 A.D. की तारीख के हैं। शांतिनाथजी जैन तीर्थंकर की अधिकांश छवियाँ हिरण के प्रतीक के साथ हैं।
यह मंदिर आकार में विशाल है। इस मंदिर में चार और मंदिर हैं, जहाँ भगवान चंद्रप्रभु, भगवान अजितनाथ, भगवान पार्श्वनाथ और भगवान सम्भवनाथ की मूर्तियाँ स्थापित हैं।जैनमतानुसार क्षेत्र से दो चक्रवर्ती, 10 कामदेव व साढे तीन करोड मुनि मोक्ष को गये थे ।  

Map

संवत 1535 में इंदौर में रहने वाले भट्टारक महेन्द्रकीर्ति का प्राचीन क्षेत्र होने का सपना था। स्वप्न के अनुसार, भट्टारक महेन्द्रकीर्ति ने जंगलों में इस क्षेत्र की खोज शुरू की और उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक उसकी खोज की, 1545 में, भट्टारक महेन्द्रकीर्ति को नर्मदा नदी के तट पर एक जीर्ण-शीर्ण अवस्था में यह मंदिर मिला, यह विशाल मंदिर में भगवान आदिनाथ और भगवान चंद्रप्रभु की मूर्ति भी देखी गई। मंदिर को 1951 में पुनर्निर्मित किया गया था और सभी मूर्तियों का  पंचकल्याण किया करके उन्हें प्रतिष्ठित किया गया था। क्षेत्र पर मूल प्रतिमा भगवान सम्भवनाथजी की है।

वर्तमान में क्षेत्र पर भगवान आदिनाथ, भगवान नेमीनाथ, भगवान पाष्र्वनाथ, भगवान शांतिनाथ, भगवान महावीर , भगवान बाहुबली आदि सहित कुल 13 मन्दिर है । क्षेत्र पर मानसतम्भ व चरण छत्री भी है ।

यहाँ फाल्गुन सुदी 15 व एकम चैत्र वदी 1 को एवं होली पर मेला लगता है। तीन दिवसीय भव्य आयोजन बाहुबली स्वामी का महामस्तकाभिषेक।

यह सिद्ध क्षेत्र कावेरी नदी के एक किनारे पर स्थित है और दूसरी तरफ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा के तट पर स्थित है। क्षेत्र से ओमकेश्वर जाने के लिए एक झूलापुल और नौका का भी उपयोग किया जाता है।
क्षेत्र पर आवास व भोजनालय की व्यवस्था है ।

Video 


दर्शनीय स्थल

ओंकारेश्वर जल विद्युत परियोजना (बांध) नर्मदा नदी का सुहावना दृश्य-1 कि.मी. एवं पर्यटन स्थल-2 कि.मी.

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र 

ऊन (पावागिरि) - 110 कि.मी., बावनगजा - 200 कि.मी., गोम्मटगिरि (इन्दौर)- 80 कि.मी., मक्सी - 150 कि.मी., बनेड़ियाजी - 125 कि.मी.

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - ओंकारेश्वर रोड़ (मोरटक्का) - 12 कि.मी.
बस स्टेण्ड - ओंकारेश्वर - 2 कि.मी., बड़वाह - 18 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - बड़वाह से जीप, कार, बस द्वारा सड़क मार्ग
निकटतम प्रमुख नगर -  बड़वाह - 18 कि.मी., सनावद - 18 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 20,
कमरे (बिना बाथरूम) - 10
हाल - 4, (यात्री क्षमता - 200)
गेस्ट हाऊस - 2
ए.सी. कमरे - 10,  
डीलक्स कमरे - 8
यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 500.
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है।
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - है।
एस.टी.डी./ पी.सी.ओ.- है।

नाम एवं पता

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, सिद्धवरकूट पोस्ट - मान्धाता,
ओंकारेश्वर, जिला-खंडवा (मध्यप्रदेश)
टेलीफोन - 07280 - 271829, 280046, 09425450776

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Jinshaasanashtak

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