बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी (टीकमगढ़) मध्य प्रदेश
Bundelkhand's Jain Tirth - Shri Digambar Jain Sidhha Aharji, Tikamgarh (M.P.)
आज से लगभग 133 वर्ष पूर्व सन 1884 (वि.सं. 1941) तक अहार जी क्षेत्र एक विशाल रेत के टीले में तब्दील था। टीकमगढ़ जिले के नारायणपुर ग्राम के एक जैन व्यापारी श्री सबदल बजाज जी का घोड़ा खो गया था,जिसे खोजते हुये बे उस टीले पर पहुंचे। टीले पर खड़े होकर घोड़े के लिये चारों ओर नजर दौड़ाई, तभी बहां उन्होने कुछ बच्चों को खेलते हुये देखा। उन से घोड़े के बारे में पूंछा। वहा टीले पर बच्चे रेत का खेल खेल रहे थे। वहा पर कुछ छेद (छिद्र)बने हुये थे, जिनमें बच्चे आवाज लगाते और उन्हें बदले में प्रतिध्वनि सुनाई देती। श्री बजाज जी ने भी ऐसा करके देखा और उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि इसके नीचे कुछ विशेष रचना मंदिर या मठ आदि हो सकता है। वे पास के ग्राम पठा गये और वहां पर जैन विद्वान पं. भगवानदास जी वैद्य से इस बारे में चर्चा की। कुछ समय बाद दौनों लोग पुन: टीले पर आये और स्थिति का जायजा लिया।
दोनों महानुभावों ने मजदूरों को लेकर खुदाई प्रारम्भ कराईतो कुछ ही दूरी पर मंदिर का दरवाजा मिल गया। भीतर जाकर देखा तो भगवान शांतिनाथ एवं भगवान श्री कुंथुनाथ जी की दो खड़्गाीसन खण्डित प्रतिमायें खड़ी थीं। पुन: खुदाई प्रारम्भ हुई और एक विशाल मंदिर जो कि रेत के टीले में दबा हुआ था, धीरे धीरे प्रकट हो गया। क्षेत्र के दक्षिण दिशा में स्थित पर्वत पर सैकड़ों मूर्तियां खण्डित अवस्था में पड़ी हुई थींजिन्हें एकत्रित करके संग्रहालय में लाया गया। अहार क्षेत्र के इस संग्रहालय में ग्यारहवीं शताब्दी से पंद्रहवीं शताब्दी तक की सैकड़ों मूर्तियां विद्यमान हैं।
प्रसिद्ध क्षेत्र आहार जी सिद्ध क्षेत्र के साथ अतिशय क्षेत्र भी है, यहां पाणाशाह नामक प्रसिद्ध सृष्टि प्रवर के रांगा से भ्ररे बोरे चांदी में परिवर्तित हो गये थे। जब एक माह की व्रत के बाद, एक तपस्वी संत को यहां एक यक्षिणी द्वारा उपसर्ग किये जाने पर आहार (भोजन) मिला तभी से इस जगह का नाम आहारजी के रूप में प्रसिद्ध हो गया ! काफी इतने सारे लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं। पूर्व में यहां के शासक मदन बर्मनदेव के होने से उन्हीं के नाम से मदन सागर सरोवर वर्तमान में स्थित है।
सिद्ध क्षेत्र आहार जी में मूलनायक शांतिनाथ भगवान का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में देशी पाषाण की अखंडशिला से निर्मित भगवान शांतिनाथ की अत्यंत मनोहारी परम आभामंडल से संपन्न 21 फुट की कलात्मक प्रतिमा विराजमान है। भगवान कुंथुनाथ की लम्बाई 11 फीट है तथा अरहनाथ की नवीन मूर्ति जो 1958 के गजरथ में स्थापित की गयी थी बह भी 11 फीट (सफेद संगमरमर) की है। शांतिनाथ तथा कुंथुनाथ की प्रतिमाओंपर रत्नों की पालिश है।
Map
क्षेत्र पर संख्या
मन्दिरों की संख्या - 08,
मानस्तम्भ-2,
चरणछतरी-6 (पंचपहाड़ी पर)
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
पपौराजी - 22 कि.मी., द्रोणगिरि - 56 कि.मी., खजुराहो - 125 कि.मी., श्री फलहौड़ी - बड़ागाँव-30 कि.मी., ओरछा-110 कि.मी., कुंडेश्वर - 30 कि.मी.
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास -
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास -
कमरे (अटैच बाथरूम) - 22,
कमरे (बिना बाथरूम) - 150
हाल - 3 (यात्री क्षमता - 200),
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000.
ए.सी.कमरे-02 , डीलक्स कमरे-14
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है (आयुर्वेदिक)
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - है (संस्कृत विद्यालय, एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। छात्रावास, व्रती आश्रम)
आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - मऊरानीपुर-62 कि.मी., ललितपुर-83 कि.मी., झाँसी-120 कि.मी.
बस स्टेण्ड - बलदेवगढ़ - 10 कि.मी., टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग टीकमगढ़ से अहारजी
निकटतम प्रमुख नगर - टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
नाम एवं पता
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है (आयुर्वेदिक)
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - है (संस्कृत विद्यालय, एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। छात्रावास, व्रती आश्रम)
आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - मऊरानीपुर-62 कि.मी., ललितपुर-83 कि.मी., झाँसी-120 कि.मी.
बस स्टेण्ड - बलदेवगढ़ - 10 कि.मी., टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग टीकमगढ़ से अहारजी
निकटतम प्रमुख नगर - टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, अहारजी तहसील - बल्देवगढ़,
जिला - टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) पिन - 472 001
टेलीफोन - 07683-298932, 09926610184,
टेलीफोन - 07683-298932, 09926610184,
नरेन्द्रकुमार जैन-09425141593

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