भोर वंदन
किसी की अर्थी यात्रा में जाओ तो..
तो यह मत समझना की आप उसे
उसकी मज़िल पर ले जा रहे हैं..
बल्कि यह समझना की अर्थी पर लेटा इंसान..
मुर्दा होकर भी तुम्हे तुम्हारी मंज़िल दिखाने ले जा रहे है..
"जिनशासनाष्टक" रत्नात्रयमय जिनशासन ही महावीर का शासन है। क्या चिंता अध्रुव की तुझको, ध्रुव तेरा सिंहासन है ।।टेक॥ द्रव्यदृष्टि...
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