Wednesday, February 24, 2021

Atishay Kshetr Ajayagadh Madhya Pradesh

 श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़,पन्ना (मध्यप्रदेश)
Shri Digambar Jain Atishay Area, Ajaygarh, Panna (Madhya Pradesh) 


 अजयगढ़ मप्र के पन्ना जिले से 32 किमी दूर स्थित है। यह खजुराहो से चार घंटे की ड्राइव भी है, लेकिन सड़कें बहुत खराब और उबड़-खाबड़ हैं। जयपाल पहाड़ी की चोटी पर बना मंदिर 9 वीं शताब्दी में चंदेल वंश द्वारा बनाया गया था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब यह मंदिर अपनी महिमा खो चुका है। पेड़ हर तरफ बढ़ने लगे हैं और किला अपनी उम्र से काफी पुराना लगता है। किले के मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सौ से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

मंदिर के अंदर तीर्थंकर शांतिनाथ की 12 फीट ऊंची मूर्ति है। इसके साथ ही, भगवान कुंथुनाथ और अरनाथ की मूर्तियाँ भी हैं। यहां एक सहस्त्रकूट जिनालय भी बनाया गया है। सभी में बिखरी हुई जैन मूर्तियों के टूटे हुए टुकड़े देख सकते हैं। यह स्थान अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और उन्होंने यहां की जा रही पूजा को रोक दिया है, केवल दर्शन की अनुमति है। दो मंदिरों का निर्माण कार्य चल रहा है। 

Map


आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - सतना - 100 कि.मी.
बसस्टेण्ड पहुँचने का सरलतम मार्ग - अजयगढ़ पन्ना अथवा बाँदा से सड़क मार्ग द्वारा
निकटतम प्रमुख नगर - पन्ना - 32 कि.मी.

 
प्रबन्ध व्यवस्था
संस्था - दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी, अजयगढ़
अध्यक्ष - श्री राजकुमारजी जैन (09981091591)
मंत्री - श्री कोमलचन्द जैन (09179320609) श्री सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498)
प्रबन्धक - सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498) 

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
खजुराहो-50 कि.मी.,
द्रोणागिरि, नैनागिरि,
श्रेयांसगिरि-100 कि.मी.,
चित्रकूट - 100 कि.मी.,
कालिंजर-30 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - नहीं
भोजनशाला - नहीं
औषधालय - है (शासकीय)
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - है।

नाम एवं पता -
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़, पोस्ट/तहसील - अजयगढ़,
जिला - पन्ना (मध्यप्रदेश) पिन - 488220
टेलीफोन - 07730 - 278244, मो.: 094250-25925

Tuesday, February 23, 2021

Bundelkhand's Jain Tirth

बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी (टीकमगढ़) मध्य प्रदेश

Bundelkhand's Jain Tirth - Shri Digambar Jain Sidhha Aharji, Tikamgarh (M.P.)

आज से लगभग 133 वर्ष पूर्व सन 1884 (वि.सं. 1941) तक अहार जी क्षेत्र एक विशाल रेत के टीले में तब्दील था। टीकमगढ़ जिले के नारायणपुर ग्राम के एक जैन व्यापारी श्री सबदल बजाज जी का घोड़ा खो गया था,जिसे खोजते हुये बे उस टीले पर पहुंचे। टीले पर खड़े होकर घो‌ड़े के लिये चारों ओर नजर दौड़ाई, तभी बहां उन्होने कुछ बच्चों को खेलते हुये देखा। उन से घोड़े के बारे में पूंछा। वहा टीले पर बच्चे रेत का खेल खेल रहे थे। वहा  पर कुछ छेद (छिद्र)बने हुये थे, जिनमें बच्चे आवाज लगाते और उन्हें बदले में प्रतिध्वनि सुनाई देती। श्री बजाज जी ने भी ऐसा करके देखा और उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि इसके नीचे कुछ विशेष रचना मंदिर या मठ आदि हो सकता है। वे पास के ग्राम पठा गये और वहां पर जैन विद्वान पं. भगवानदास जी वैद्य से इस बारे में चर्चा की। कुछ समय बाद दौनों लोग पुन: टीले पर आये और स्थिति का जायजा लिया।
दोनों महानुभावों ने मजदूरों को लेकर खुदाई प्रारम्भ कराईतो कुछ ही दूरी पर मंदिर का दरवाजा मिल गया। भीतर जाकर देखा तो भगवान शांतिनाथ एवं भगवान श्री कुंथुनाथ जी की दो खड़्गाीसन खण्डित प्रतिमायें खड़ी थीं। पुन: खुदाई प्रारम्भ हुई और एक विशाल मंदिर जो कि रेत के टीले में दबा हुआ था, धीरे धीरे प्रकट हो गया। क्षेत्र के दक्षिण दिशा में स्थित पर्वत पर सैकड़ों मूर्तियां खण्डित अवस्था में पड़ी हुई थींजिन्हें एकत्रित करके संग्रहालय में लाया गया। अहार क्षेत्र के इस संग्रहालय में ग्यारहवीं शताब्दी से पंद्रहवीं शताब्दी तक की सैकड़ों मूर्तियां विद्यमान हैं। 
प्रसिद्ध क्षेत्र आहार जी सिद्ध क्षेत्र के साथ अतिशय क्षेत्र भी है, यहां पाणाशाह नामक प्रसिद्ध सृष्टि प्रवर के रांगा से भ्ररे बोरे चांदी में परिवर्तित हो गये थे। जब एक माह की व्रत के बाद, एक तपस्वी संत को यहां एक यक्षिणी द्वारा उपसर्ग किये जाने पर आहार (भोजन) मिला तभी से इस जगह का नाम आहारजी के रूप में प्रसिद्ध हो गया ! काफी इतने सारे लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं। पूर्व में यहां के शासक मदन बर्मनदेव के होने से उन्हीं के नाम से मदन सागर सरोवर वर्तमान में स्थित है।
सिद्ध क्षेत्र आहार जी में मूलनायक शांतिनाथ भगवान का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में देशी पाषाण की अखंडशिला से निर्मित भगवान शांतिनाथ की अत्यंत मनोहारी परम आभामंडल से संपन्न 21 फुट की कलात्मक प्रतिमा विराजमान है।  भगवान कुंथुनाथ की लम्बाई 11 फीट है तथा अरहनाथ की नवीन मूर्ति जो 1958 के गजरथ में स्थापित की गयी थी बह भी 11 फीट (सफेद संगमरमर) की है। शांतिनाथ तथा कुंथुनाथ की प्रतिमाओंपर रत्नों की पालिश है। 
 
Map
 
 
क्षेत्र पर संख्या
मन्दिरों की संख्या - 08, 
मानस्तम्भ-2, 
चरणछतरी-6 (पंचपहाड़ी पर)
 
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - 
पपौराजी - 22 कि.मी., द्रोणगिरि - 56 कि.मी., खजुराहो - 125 कि.मी., श्री फलहौड़ी - बड़ागाँव-30 कि.मी., ओरछा-110 कि.मी., कुंडेश्वर - 30 कि.मी.
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास - 
कमरे (अटैच बाथरूम) - 22, 
कमरे (बिना बाथरूम) - 150 
हाल - 3 (यात्री क्षमता - 200), 
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000. 
ए.सी.कमरे-02 , डीलक्स कमरे-14
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है (आयुर्वेदिक)
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - है (संस्कृत विद्यालय, एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। छात्रावास, व्रती आश्रम)

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - मऊरानीपुर-62 कि.मी., ललितपुर-83 कि.मी., झाँसी-120 कि.मी.
बस स्टेण्ड - बलदेवगढ़ - 10 कि.मी., टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग टीकमगढ़ से अहारजी
निकटतम प्रमुख नगर - टीकमगढ़ - 25 कि.मी.


नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, अहारजी तहसील - बल्देवगढ़, 
जिला - टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) पिन - 472 001
टेलीफोन - 07683-298932, 09926610184, 
नरेन्द्रकुमार जैन-09425141593 
 
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Monday, February 22, 2021

Banediyaji jain mandir indore

 अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश


जी हा दोस्तो क्या आप ने सुना है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर के बारे में तो सही सुना है कहा जाता है की यह उड़ता हुआ आया था. पूरे भारत में शायद ही ऐसा मंदिर होगा जो उड़ कर आया होगा यह एक मात्र मंदिर है बनेडिया जी का जिसकी कोई नीब नही है. इससे यह प्रमाणित होता है की मंदिर सही में उड़ केर आया था.
यह मंदिर  इंदौर से मात्र 40 km और  देपालपुर से 4 km पर है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर ।

श्री बनडियाजी अथियाक्षेत्र लगभग आठ सौ वर्ष पुराना है। यह एक विशाल तालाब के किनारे पर स्थित है। तालाब का एक सिरा देपालपुर को छूता है। यह माना जाता है कि अतीत में देपालपुर से बनाडिया तक फैला एक बड़ा शहर रहा होगा। मूलनायक प्रतिमा भगवान अजितनाथ की अति प्राचीन, अतिशय युक्त व मनोमुग्धकारी है। मंदिर में सैकड़ों प्राचीन प्रतिमाएँ विराजमानहैं। किंवदन्ती है कि इस जैन मन्दिर को महात्माओं द्वारा आकाश मार्ग से पृथ्वी पर उतारा गया है।

इस मंदिर के बारे में लोकप्रिय बात यह है कि इस मंदिर की कोई नींव नहीं है और अभी भी यह सैकड़ों वर्षों से यहां खड़ा है और कई प्राकृतिक आपदाओं को झेल चुका है। यह एकमात्र आतिशाक्षेत्र है, जहां मंदिर भारत में नींव के बिना है। भगवान अजितनाथ की मूर्ति से संबंधित चमत्कारों के बारे में कई लोकप्रिय कहानियां हैं। केवल जैन ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के हजारों लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करने आते हैं। वार्षिक मेले के अवसर पर हजारों की संख्या में पुरुष और महिलाएँ यहाँ इकट्ठा होते हैं और बड़ी धार्मिक श्रद्धा और भक्ति दिखाते हैं। 

Map

 

विशेष जानकारी :
देपालपुर-बनेड़िया जंक्शन पर श्री दि. जैन सोशल ग्रुप, इन्दौर नगर व ट्रस्ट के सहयोग से विशाल अजितनाथ द्वार यात्रियों की जानकारी हेतु निर्मित किया गया है।
समीपवर्तीतीर्थक्षेत्र गोम्मटगिरि - 30 कि.मी.,
सिद्धवरकूट - 125 कि.मी.
मक्सीजी - 95 कि.मी.,
सूमठा -8 कि.मी.

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - गौतमपुरा रोड़ - 21 कि.मी., इन्दौर - 45 कि.मी.
बस स्टेण्ड - देपालपुर से बनेड़ियाजी - 4 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर से बनेड़िया सड़क मार्ग, उज्जैन, धार, गौतमपुरा से सड़क मार्ग, बस, टेम्पो, जीप सुविधा उपलब्ध
निकटतम प्रमुख नगर - इन्दौर - 45 कि.मी., देपालपुर - 4 कि.मी. 

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 10, कमरे
(बिना बाथरूम) - 20 (
6 सुसज्जित डीलक्स कमरे)
हाल - 1 (यात्री क्षमता - 100+25),
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 300.
भोजनशाला - नियमित, सशुल्क
अन्य - संतसदन
औषधालय -   है |
पुस्तकालय - पुस्तके - 200
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। 

अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश
नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, बनेड़ियाजी ग्राम - बनेड़िया,
तहसील - देपालपुर, जिला - इन्दौर (मध्यप्रदेश) पिन - 453115
टेलीफोन - 098937-13839 

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Sunday, February 21, 2021

Manatungagiri Tirthakshetra - श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 


भारत भूमि पर एक ऐसा अतिशय तीर्थ क्षेत्र है जो कि जैन दर्शन के भक्तामर स्त्रोत की रचना स्थली के स्मृति रूप मानतुंगगिरी के नाम से जाना जाता है. मानतुंगगिरी यथानाम एक ऊंची पहाड़ी पर ऐसे शांत परिवेश में निर्मित है जहां पहुंचकर भगवान आदिनाथ की विशालतम खड्गासन  प्रतिमा एवं मानतुंगचार्य की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन मात्र से हृदय को सहज ही अवर्णनीय आनंद की अनुभूति होती है. 

इस जगह की एक बहुत ही प्रचलित कथा है. कहा जाता है उस समय मालवा की भूमि पर धार नगरी में राजा भोज का राज्य था.  राजा ने किसी आवेश में आकर आचार्य मानतुंग स्वामी को ४८ कोठरियों में (बन्दीगृह में) बन्द कर दिया था. तब आचार्य ने भगवान आदिनाथ की अटूट भक्ति की और ४८ काव्यों की रचना की जिसके फलसरूप उस बन्दीगृह के ४८ ताले स्वयमेव टूट गए, भक्ति का ऐसा अदभुत चमत्कार देखकर राजा भोज को भी मुनिराज के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा। यह स्तोत्र आज भक्तामर स्तोत्र के नाम प्रसिद्ध हुआ है।

धार (मध्य प्रदेश) से मात्र 3 KM दूर इंदौर एवं अहमदाबाद पर एक पावन स्थल जोकि अतिशय तीर्थ क्षेत्र मानतुंगगिरी के नाम से विश्व प्रसिद्ध है. भक्तामर काव्यों की रचना स्थली के स्मृति रूप एकमात्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र जो की समादिस्थ गुजरात संत श्री परम पूज्य आचार्य श्री भरत सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से विकास गति की ओर अग्रसर है. आचार्य श्री कि आचार्य दीक्षा स्थली की स्मृति रूप यह क्षेत्र हे. गुरुदेव वात्सल्य शिरोमणि रहे मानवकुंज रहे हो आज आपके और हमारे बीच नहीं हैं उसके बावजूद यहा जा काम प्रगति पर है. आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज की प्रेरणा से यहां काम आगे बाद रहा है. 

Map

  

 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ  
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 12,(बिना बाथरूम) - 7 हाल -1, गेस्ट हाउस - ४ यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 100.
भोजनशाला - है सशुल्क, अनुरोध पर - संत सदन एवं प्रवचन हॉल
औषधालय - निर्माणाधीन
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - नहीं ।
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - नहीं

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - इन्दौर-67 कि.मी., रतलाम-80 कि.मी., मेघनगर -110 कि.मी.
बस स्टेण्ड - धार - 3 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर - अहमदाबाद तिरला रोड़ (आमखेड़ा), धार से बसें उपलबध रहती हैं।
निकटतम प्रमुख नगर - धार - 3 कि.मी.

क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या :
3-पूर्ण विकसित मार्बलीकरण एवं कांच का कार्य
क्षेत्र पर पहाड़ : है। 108 सीढ़ियाँ है।

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
चमत्कारिक क्षेत्र आहूजी - 13 कि.मी.,
बावनगजा - 110 कि.मी.,
गोम्मटगिरि-64 कि.मी.,
बनेड़िया-70 कि.मी.,
अतिशय क्षेत्र-कागदीपुरा-22 कि.मी.

अन्य दर्शनीय एवं एतिहासिक स्थल
धार किला,
भोजशाला,
फड़के स्टूडियो,
पुरातत्त्व संग्रहालय,
दि. जैन शांतिनाथ मंदिर,
मोहनखेड़ा (श्वे.जैन) तीर्थक्षेत्र (राजगढ़) - 45 कि.मी.
  

नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा
जिला - धार (मध्यप्रदेश) पिन - 454001
टेलीफोन - 07292 - 233400, 09424580671


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Wednesday, February 17, 2021

Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore

 Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore


इंदौर मध्य प्रदेश का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है और दिगंबर जैनियों का मुख्य केंद्र भी है। शहर में कई जैन संस्थान और मंदिर हैं। 

कांच मंदिर, प्रसिद्ध जैन मंदिर में से एक मंदिर है. इसे सेठ हुकुमचंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | यह मंदिर सर सेठ हुकुमचंद द्वारा बनवाया गया था | श्री विक्रम सवंत १९७८ मिति आषाढ़ सुदी ७ सोमवार सन १९२१ में इसमें मूर्ति स्थापना कि गयी | ये मंदिर न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं, बल्कि उनकी वास्तुकला, बनावट और सुंदरता के लिए भी जाने जाता हैं।

यह मंदिर सफेद पत्‍थर से बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण हवेली के रूप में किया गया था. इसे कांच का मंदिर इस लिए कहा जाता है क्योकि मंदिर का अंदरूनी हिस्‍सा पूरी तरह कांच के दर्पण और टुकड़े की नकाशी से निर्मित किया है। मंदिर के अंदर हर जगह जैसे दीवारें, छत, फर्श, खंभे और दरवाज़े पूरी तरह से कांच से जड़े हैं। 

Map

इस मंदिर में एक विशेष ग्लास कक्ष है. इस मंदिर में तीन मूर्तियाँ स्थापित हैं, मध्य में श्री शांतिनाथ भगवान व उनके दाहिने हाथ कि और श्री चंद्रप्रभा भगवान एवं बायीं और आदिनाथ भगवान विराजे है. जो इन मूर्तियों की छवियों को अनिश्चित संख्या में गुणा करती हैं। इस मंदिर में जो कांच के दर्पण और रंग बिरंगे टुकड़े की नकाशी है, और उससे बने सुंदर चित्रों को देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से यहां आते हैं। इसके दरवाजे लकड़ी के बने हुए है और उस पर चाँदी कि परत लगाई गयी है | इनकी दीवारों पर की गयी कांच की नक्काशी में जैन धर्म कि कहानिया और तीर्थ स्थल के दृश्य बनाये गये है. जो मंदिर के अंदरूनी हिस्से को शानदार बनता है.

यह मंदिर सिटी के मध्य में होने की वजह से यहा सभी जैन त्योहार बहुत धूम धाम से बनाया जाता है.  जब त्योहार होते है तो यह पर विधान होता है, सुगंध दशमी के दिन, विशेष मंडलों का निर्माण बहुरंगी चावल-पाउडर का उपयोग करके किया जाता है, रंग रंग कार्यक्रम होते है. त्योहारों पर जैन धर्म का महत्व भी समझाय जाता है युवा पीढ़ी को.


मंदिर सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक यह मंदिर आम जनता के लिए खुला रहता है |

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - इन्दौर - 3 km.
बस स्टेण्ड - इन्दौर - 3.3 km.
एयरपोर्ट - इन्दौर - 8.6 km

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र

मानतुंगगिरि-13 कि.मी.,
बनेड़िया-75 कि.मी.,
बावनगजा (चूलगिरि)-122 कि.मी.
कागदीपुरा-38 कि.मी.,
आहू - 65 कि.मी
गोमटगिरि - 12 कि.मी
पुष्पगिरी - 65 कि.मी
मक्सी - 72 कि.मी

तीर्थ स्थान का विवरण

कांच मंदिर,
इटवरिया बाजार,
हुकुमचंद मार्ग,
इंदौर, मध्य प्रदेश
452002

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Tuesday, February 16, 2021

Atishay Kshetra Aahu, Dhar

Shree Sankat Mochan Bhagwan Parshwanath Digambar Jain Atishay Kshetra Aahu, Dhar, Madhya Pradesh

इन्दौर नगर से ६५ कि.मी. एवं धार नगर से १३ कि.मी. दूर पश्चिम दिशा में श्री संकटमोचन आहू पार्श्वनाथ दि.जैन अतिशय क्षेत्र, आहू में स्थित है। इन्दौर-धार-अहमदाबाद मार्ग से जुड़ा होने के कारण यहाँ आवागमन सुलभ है। 

इस मदिर की एक बहुत ही प्रचलित कथा है. कहा जाता है उस समय मालवा की भूमि पर धार नगरी में राजा भोज का राज्य था.  राजा ने किसी आवेश में आकर आचार्य मानतुंग स्वामी को ४८ कोठरियों में (बन्दीगृह में) बन्द कर दिया था. तब आचार्य ने भगवान आदिनाथ की अटूट भक्ति की और ४८ काव्यों की रचना की जिसके फलसरूप उस बन्दीगृह के ४८ ताले स्वयमेव टूट गए, भक्ति का ऐसा अदभुत चमत्कार देखकर राजा भोज को भी मुनिराज के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा। यह स्तोत्र आज भक्तामर स्तोत्र के नाम प्रसिद्ध हुआ है।

इस प्राचीन अतिशय क्षेत्र पर भगवान की एक फुट ७ इंच पार्श्वनाथ की अवगाहना प्रमाण चमत्कारिक
प्रतिमा
500 वर्ष पुरानी है। लोक व्यवहार में इसके चमत्कारिक प्रसंग कहे और सुने जाते हैं। खा जाता है की पहले यह पर चैत्यालय था किन्तु लगभग 150 वर्ष पूर्व चैत्यालय को मन्दिर में रूपान्तरित किया गया। संतों की प्रेरणा से मन्दिर जीर्णोद्धार एवं क्षेत्र का विकास कार्य प्रगति पर है। 

Map 

   

वार्षिक मेला

प्रतिवर्ष पौष वदी ग्यारस के दिन यहाँ वार्षिक मेला लगता है, जिसमें हाथी, घोड़े , बग्घियाँ आदि रहती हैं। भारतवर्ष के कई भागों से यात्रीगण प्रतिदिन यहाँ अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने आते रहते हैं।

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

क्षेत्र पर जयसागर धर्मशाला है। ३ कमरे और १ हाल भी है। भोजनशाला आदि की सुविधा नहीं है। 

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - इन्दौर - 65 कि.मी.
बस स्टेण्ड - धार - 13 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग व्हाया धार
निकटतम प्रमुख नगर - धार - 13 कि.मी.

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र 

मानतुंगगिरि-13 कि.मी.,
बनेड़िया-75 कि.मी.,
बावनगजा (चूलगिरि)-122 कि.मी.
कागदीपुरा-38 कि.मी.,
मांडव-52 कि.मी.

नाम एवं पता 

श्री संकटमोचन आहू पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, आहूजी (धार)
ग्राम - आहू, जिला - धार (मध्यप्रदेश)
पिन - 454001
टेलीफोन - 07292-232370, 098260 65200

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Sidwarkut Digamber Jain, Siddha Khetra

 सिद्धवर कूट दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र Sidhwarkut Digamber Jain, Siddha Khetra 

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में सिद्धवरकुट जैन धर्मावलंबियों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह तीर्थस्थल ओंकारेश्वर से एक किमी दूर पर है। यहा दो नदियों का संगम है नर्मदा और कावेरी नदी का जिस के तट से लगा हुआ अति प्राचीन दिगम्बर जैन सिद्व क्षेत्र सिद्ववरकूट स्थित है ।

सिद्धवरकुट में कुछ पुराने और पुनर्निर्मित और कुछ नए जैन मंदिरों है। पुराने मंदिर में पाए गए कुछ चित्र 1488 A.D. की तारीख के हैं। शांतिनाथजी जैन तीर्थंकर की अधिकांश छवियाँ हिरण के प्रतीक के साथ हैं।
यह मंदिर आकार में विशाल है। इस मंदिर में चार और मंदिर हैं, जहाँ भगवान चंद्रप्रभु, भगवान अजितनाथ, भगवान पार्श्वनाथ और भगवान सम्भवनाथ की मूर्तियाँ स्थापित हैं।जैनमतानुसार क्षेत्र से दो चक्रवर्ती, 10 कामदेव व साढे तीन करोड मुनि मोक्ष को गये थे ।  

Map

संवत 1535 में इंदौर में रहने वाले भट्टारक महेन्द्रकीर्ति का प्राचीन क्षेत्र होने का सपना था। स्वप्न के अनुसार, भट्टारक महेन्द्रकीर्ति ने जंगलों में इस क्षेत्र की खोज शुरू की और उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक उसकी खोज की, 1545 में, भट्टारक महेन्द्रकीर्ति को नर्मदा नदी के तट पर एक जीर्ण-शीर्ण अवस्था में यह मंदिर मिला, यह विशाल मंदिर में भगवान आदिनाथ और भगवान चंद्रप्रभु की मूर्ति भी देखी गई। मंदिर को 1951 में पुनर्निर्मित किया गया था और सभी मूर्तियों का  पंचकल्याण किया करके उन्हें प्रतिष्ठित किया गया था। क्षेत्र पर मूल प्रतिमा भगवान सम्भवनाथजी की है।

वर्तमान में क्षेत्र पर भगवान आदिनाथ, भगवान नेमीनाथ, भगवान पाष्र्वनाथ, भगवान शांतिनाथ, भगवान महावीर , भगवान बाहुबली आदि सहित कुल 13 मन्दिर है । क्षेत्र पर मानसतम्भ व चरण छत्री भी है ।

यहाँ फाल्गुन सुदी 15 व एकम चैत्र वदी 1 को एवं होली पर मेला लगता है। तीन दिवसीय भव्य आयोजन बाहुबली स्वामी का महामस्तकाभिषेक।

यह सिद्ध क्षेत्र कावेरी नदी के एक किनारे पर स्थित है और दूसरी तरफ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा के तट पर स्थित है। क्षेत्र से ओमकेश्वर जाने के लिए एक झूलापुल और नौका का भी उपयोग किया जाता है।
क्षेत्र पर आवास व भोजनालय की व्यवस्था है ।

Video 


दर्शनीय स्थल

ओंकारेश्वर जल विद्युत परियोजना (बांध) नर्मदा नदी का सुहावना दृश्य-1 कि.मी. एवं पर्यटन स्थल-2 कि.मी.

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र 

ऊन (पावागिरि) - 110 कि.मी., बावनगजा - 200 कि.मी., गोम्मटगिरि (इन्दौर)- 80 कि.मी., मक्सी - 150 कि.मी., बनेड़ियाजी - 125 कि.मी.

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - ओंकारेश्वर रोड़ (मोरटक्का) - 12 कि.मी.
बस स्टेण्ड - ओंकारेश्वर - 2 कि.मी., बड़वाह - 18 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - बड़वाह से जीप, कार, बस द्वारा सड़क मार्ग
निकटतम प्रमुख नगर -  बड़वाह - 18 कि.मी., सनावद - 18 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 20,
कमरे (बिना बाथरूम) - 10
हाल - 4, (यात्री क्षमता - 200)
गेस्ट हाऊस - 2
ए.सी. कमरे - 10,  
डीलक्स कमरे - 8
यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 500.
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है।
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - है।
एस.टी.डी./ पी.सी.ओ.- है।

नाम एवं पता

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, सिद्धवरकूट पोस्ट - मान्धाता,
ओंकारेश्वर, जिला-खंडवा (मध्यप्रदेश)
टेलीफोन - 07280 - 271829, 280046, 09425450776

 यह भी पढ़ें-

1. Gomatgiri        
2. Maksi              
3. Pushpgiri          


Monday, February 15, 2021

MAKSI TIRTH - (अतिशय क्षेत्र मक्सी)

 MAKSI TIRTH (अतिशय क्षेत्र मक्सी)

Maksi Map

दिगम्बर जैन अतीश्याक्षेत्र मक्सी एक प्राचीन तीर्थ स्थान है। यहाँ दो मंदिर हैं। पहले बड़े मंदिर को बारा मंदिर कहा जाता है, जिसमें प्रमुख देवता भगवान पार्श्वनाथ (ऊंचाई 3.5 फीट) हैं, यह 2500 साल से अधिक पुराना माना जाता है। दूसरा मुख्य देवता भगवान सुपार्श्वनाथ (7 वें तीर्थंकर) के साथ पहले मंदिर के पास है, इसे विक्रम संवत 1899 में स्थापित किया गया था। Archaeologists के अनुसार यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है, जिसे परमार की अवधि में बनाया गया था। दोनों मंदिर एक ही परिसर में विद्यमान हैं।  विक्रम संवत 1548 में जीवराज पापारीवाल द्वारा स्थापित 42 मूर्तियाँ भी यहाँ हैं।  

अतीश्या (चमत्कार): ऐसा कहा जाता है कि एक आक्रमणकारी जब यहां विनाश करने के लिए आया था, बुरी तरह से गिर गया, अंत में उसने प्रमुख देवता के खिलाफ अपना सिर झुका दिया और मंदिर के मुख्य द्वार पर पांच पिनाक का निर्माण करने के बाद वह वहां से चला गया। चोर और डाकू यहां अंधे हो गए। एक शिलालेख भी यहां है जो चोरी के लिए किसी को भी प्रतिबंधित करता है। 
कहा जाता है की सोलहवीं शताब्दी में यह क्षेत्र ख्याति के शिखर पर पहुँच चुका था। भट्टारक ज्ञानसागर ने इस क्षेत्र के संबंध में जैसी प्रशंसा  की है, उससे इस धारणा की पुष्टि होेती है। उन्होंने लिखा है-

‘‘मालवा देश मझार नयर मगसी सुप्रसिद्धह।
महिमा मेरु समान निर्धनकू धन दीधह।
मगसी पारसनाथ सकल संकट भयभंजन।
मनवांछित दातार विघनकोटि मद गंजन।
रोग शोक भय चोर रिपु तिस नामे दूर पले।
ब्रह्म ज्ञानसागर बदति मनवांछित सधलोें फले।।
—सर्वतीर्थ वन्दना—२४


117 साल से चल रही परंपरा, विवाद भी खत्म

भगवान पार्श्वनाथ ही प्रतिमा को लेकर जैन समाज के दोनों सम्प्रदाय दिगंबर व श्वेतांबर समाजजनों में विवाद होने लगे। अपने संप्रदाय की प्रतिमा होने का दावा करते हुए दोनों समाज के लोगों के बीच कई बार विवाद भी हुए। कई सालों तक विवाद चलता रहा। 1882 में एक बार राजीनामा भी हुआ, लेकिन विवाद नहीं सुलझा। मामला ग्वालियर स्टेट के राजा जीवाजीराव सिंधिया के पास पहुंचा। उन्होंने 1902 में फैसला सुनाया। 117 साल से पूजा हो रही है।

मंदिर का समय

मिलकर कर रहते है दो  संप्रदाय इसलिए 1500 साल पुरानी भगवान की प्रतिमा का हर दिन तीन घंटे बाद बदलता है स्वरूप
पहले सुबह 6 से 9 बजे तक ध्यान मुद्रा में दिगंबर सम्प्रदाय पूजा करता है।
बाकी पूरे 21 घंटे पूजा श्वेतांबर समाज करता है. भगवान की पूजा 21 घंटे राजा के रूप में होती है  

पास की जगह

श्री अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ सेण्ट्रल रेलवे की भोपाल-उज्जैन शाखा पर मक्सी नामक स्टेशन से लगभग तीन कि.मी. दूर है। स्टेशन से लगभग एक फर्लांग दूर दिगम्बर जैन धर्मशाला भी है। क्षेत्र पर दो मंदिर हैं। उज्जैन से यह क्षेत्र ३६ कि.मी. है और इन्दौर से ७२ कि.मी.। क्षेत्र के लिए उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर से बराबर बसें मिलती हैं। यहाँ पोस्ट आफिस है। इसका जिला शाजापुर है। गाँव का नाम, जहाँ यह क्षेत्र है, कल्याणपुर है।

सालाना जलसे

वार्षिक रूप से रंगपंचमी पर एकत्रित होते हैं।  
 
तीर्थ स्थान का विवरण:  
ए / पी: - मक्सी 
ताल: - शाजापुर 
जिला: - शाजापुर 
राज्य: - मध्य प्रदेश  
पिन कोड: - 465106  
दूरभाष:-07363-233028, 09893473517 
 
तीर्थ यात्रा सुविधा:  
कमरे: - हाँ (एसी / नॉन एसी)  
हॉल: - हाँ  
मेस: - हाँ  
 

Gomatgiri jain Temple Indore - गोमटगिरि

 अतिशय क्षेत्र गोम्मटगिरि - इन्दौर मध्यप्रदेश

 


गोमटगिरि: 1981 में, म.प्र। जैन समाज के आग्रह पर गोमटगिरि की पहाड़ी को सरकार ने जैन समाज को दान दिया था. 

गोमटगिरि अतिशय तीर्थ को बनाने की प्रेरणा राष्ट्रसंत विद्यानंदजी महाराज ने दी थी। यह बात 1979 की है, जब मुनिराज देपालपुर रोड से श्रवणबेलगोला की और मंगल विहार कर रहे थे. तभी उन्हें देपालपुर रोड स्थित इस पहाड़ी पर भगवान बाहुबली भगवन की छवि दिखाई दी थी। 1981 में समाज के वरिष्ठ लोग जैसे दिवंगत दुलीचंद सेठी, शांतिलाल पाटनी व बाबूलाल पाटोदी जी ने आचार्यश्री के निर्देश अनुसार इस भव्य मंदिर बनाने का बीड़ा उठाया। उस समय समाजजन ने 2 लाख रु. एकत्रित किए थे मंदिर लो निर्माण कर ने के लिए. 

इंदौर शहर के मुख्य आकर्षण में गोम्मटगिरि दिगंबर जैन मंदिर एक प्रमुख स्थान है। इस मंदिर की खास बात यह है की २४ भगवन के मध्य में गोमतेश्वर की 21 फीट की प्रतिमा विरजामन है . जो श्रावणबेगोला की बाहुबली प्रतिमा की प्रतिकृति थी। यहां पर 24 संगमरमर के मंदिर उनके शिकारों के साथ बनाए गए हैं। 

जैन धर्म के अनेक जैन धर्मावलंबी इस तीर्थ के दर्शन के लिए आते हैं और जैन दर्शन को समझते हैं । पूरे तीर्थ क्षेत्र की रचना संपूर्ण जैन धर्म की कहानी बताता हैं ।

रविवार के दिन यहां पर जैनो का मेला सा लग जाता है यह लोग दर्शन के साथ साथ  भोजन का लुफ्त उठाते है यहां हर रविवार प्रसिद्ध दाल-बाटी बनाई जाती है भोजनालय में.  

क्षेत्र का महत्व

क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : 24 मंदिर, 21 फीट, बाहुबली प्रतिमा,
आदिनाथ मंदिर-3, महावीर मंदिर-1,
रत्नत्रय मंदिर, तलहटी पर आदिनाथ मंदिर - 1
आदि (कुल - 32 मन्दिर)
क्षेत्र पर पहाड़ : है (पहाड़ पर 110 सीढ़ियाँ है), वाहन जाते हैं ।

गोमटगिरी के पास अन्य तीर्थ क्षेत्र

बनेडिया जी जैन मंंदिर - 30 km
मक्सी पारसनाथ- 80 km
काँच मंदिर इंदौर  - 10 km
तीर्थ नवग्रह जिनालय - 3 km 

आवागमन के साधन गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र

रेलवे स्टेशन - इंदौर {. 15 km}
बसस्टैंड -   गंगवाल बस स्टैंड , इंदौर - 10 km
सरवटे बस स्टैंड इंदौर - 14 km

अतिशय क्षेत्र गोम्मटगिरि - इन्दौर मध्यप्रदेश 

नाम एवं पता -
भगवान बाहुबली दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र,
गोम्मटगिरि हातोद रोड़, तहसील - हातोद,
जिला - इन्दौर (मध्यप्रदेश) पिन - 453111
सम्पर्क: +91-731-2499566

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं

आवास - कमरे (अटैच्ड बाथरूम) - 45,
(क्षेत्र पर धर्मशालाएँ हैं) बेसमेंट -3 में गेस्ट हाउस - 1
 पहाड़ी पर एसी रूम -8
हॉल - 5 (यात्री क्षमता - 350),
गेस्ट हाउस - 3 यात्रियों को समायोजित करने की कुल क्षमता - 1000. तलहटी पर

यह भी पढ़ें-
 Pushpgiri Jain Temple

 


Sunday, February 14, 2021

What are the five? - पाँच क्या-क्या होते हैं

 पाँच क्या-क्या होते हैं

 पांच होते हैं -
 1. व्रत पाँच -1.अहिंसा, 2. सत्य, 3.अचौर्य, 4.ब्रम्हचर्य, 5.अपरिग्रह।
 2. पाप पाँच - 1.हिंसा, 2.झूठ, 3. चोरी, 4.कुशील 5.परिग्रह।
 3. शरीर पाँच - 1.औदारिक, 2.वैक्रियक, 3.आहारक 4.तैजस , 5. कार्मण
 4. भाव पाँच - 1.औपशमिक भाव, 2.क्षायिक भाव, 3.क्षायोपशमिक भाव, 4.औदायिक भाव, 5.पारिणामिक भाव।
 5. समिति पांच - 1.ईर्या समिति, 2.भाषा समिति, 3.एषणा समिति, 4. आदाननिक्षेपण समिति 5.प्रतिष्ठापन (व्युत्सर्ग) समिति।
 6. इन्द्रिय पांच - 1.स्पर्शन, 2.रसना, 3.घ्राण, 4.चक्षु 5.कर्ण।
 7. आचार पांच - 1.दर्शनाचार, 2.ज्ञानाचार,3.चारित्रचार, 4.तपाचार, 5.वीर्याचार।
 8. उदम्बरुल पांच - 1.बड़, 2.पीपल, 3.पाकर, 4.गूलर 5.कठूमर।
 9. मिथ्यात्व पाँच - 1.विपरीत, 2.एकान्त, 3.संशय 4.विनय, 5.अज्ञान।
 10. ज्ञान पाँच - 1.मतिज्ञान, 2.श्रुतज्ञान, 3.अवधिज्ञान, 4.मन:पर्ययज्ञान, 5.केवलज्ञान।
 11. परमेष्ठी पाँच - 1.अरहन्त, 2.सिद्ध, 3.आचार्य 4.उपाध्याय, 5.साधु।
 12. अन्तराय कर्म के पाँच भेद- 1.दान अन्तराय, 2.लाभ अन्तराय, 3.भोग अन्तराय, 4.उपभोग अन्तराय, 5.वीर्य अन्तराय।
 13. लब्धि के पांच प्रकार - 1.क्षयोपशम लब्धि, 2.विशुद्ध लब्धि, 3.देशना लब्धि, 4. प्रायोग्य लब्धि, 5. कारण लब्धि
 14. अनुत्तर विमान पाँच - 1.विजय, 2.वैजयन्त 3.जयन्त, 4. अपराजित, 5. सर्वार्थसिद्धि।
 15. ज्योतिषी देव पाँच - 1.सूर्य, 2.चन्द्रमा, 3.ग्रह 4.नक्षत्र, 5.तारे।
 16. चौदहवें गुणस्थान का काल- 1.अ, 2.अ. 3.उ, 4.ऋ, 5.लृ  इन पाँच हस्व स्वरों के उच्चारण काल मात्र।
 17. बाल ब्रम्हचारी तीर्थंकर पाँच हैं (पंचबालयति) - 1.वासुपूज्य, 2.मल्लिनाथ, 3.नेमिनाथ, 4.पार्श्वनाथ, 5.महावीर।
 18.  मेरू पाँच- 1.सुदर्शन, 2.विजय, 3.अचल, 4.मन्दर, 5.विद्युन्माली।
 19. बन्ध के पाँच कारण - 1.मिथ्यादर्शन, 2.अविरति, 3.प्रमाद, 4.कषाय, 5.योग।
 20. मुनि के पांच प्रकार - 1.पुलाक, 2.बकुश, 3.कुशील, 4. निर्ग्रंथ, 5.स्नातक।
 21. अहिंसा व्रत के पाँच अतिचार - 1.बन्ध, 2.वध, 3.छेदन, 4.अतिभारारोपण, 5.अन्नपान निरोध।
 22. सत्य व्रत के पाँच अतिचार - 1.मिथ्योपदेश, 2.रहोभ्याख्यान, 3.कूटलेखक्रिया, 4.न्यासापहार, 5.साकार मंत्र भेद।
 23. अचौर्य व्रत के पाँच अतिचार - 1.स्तेनप्रयोग, 2.तदाहृतादान, 3.विरुद्धराज्यातिक्रम. 4.महीना अधिक मान सन्मान, 5.प्रतिरूपक व्यवहार।
 24. ब्रह्मचर्य व्रत के पाँच अतिचार - 1.परविवाहकरण, 2. परगृहीतेत्वरिकागमन, 3.अपरिगृहीतेत्वरिकागमन,4.अनंगक्रीड़ा, 5.कामतीव्राभिनिवेश।
 25. अपरिग्रह व्रत के पाँच अतिचार - 1.क्षेत्र-वास्तु प्रमाणात अतिक्रमण, 2.हिरण्य-सुवर्ण प्रमाणातिक्रम, 3.धन-धान्य प्रमाणातिक्रम, 4.दासी-दास प्रमाणातिक्रम, 5.कुप्य प्रमाणातिक्रम।
 26. स्वाध्याय के पाँच भेद - 1.वाचना, 2.पृच्छना, 3.अनुप्रेक्षा, 4.आम्नाय, 5.धर्मोपदेश।
 27. समाधि मरण के पाँच अतिचार - 1.जीवितासंशा, 2.मरणासंशा, 3.मित्रानुराग, 4.सुखानुबन्ध, 5.निदान।
 28. अहिंसा व्रत की भावना पाँच - 1.वचन गुप्ति, 2.मनोगुप्ति, 3.ईर्या समिति, 4.आदाननिक्षेपण समिति, 5.आलोकित पान भोजन।  
 29. सत्य व्रत की भावना पाँच - 1.क्रोध का त्याग, 2.लोभ का त्याग, 3.भय का त्याग, 4.हास्य का त्याग, 5.अनुविचि भाषण।
 30. अचौर्य व्रत की भावना पाँच - 1. खाली घर में रहना, 2. किसी के छोड़े हुए स्थान में रहना, 3. अन्य को अपने ठहरे स्थान में आने से रोकना नहीं, 4.शास्त्र विहित भिक्षा की विधि में न्यूनाधिक नहीं करना, 5.साधर्मी भाइयों से विसंवाद नहीं करना।
 31. ब्रह्मचर्य व्रत की भावना पाँच - 1.स्त्रियों में प्रीति उत्पन्न कराने वाली कथाओं को सुनने का त्याग। 2.स्त्रियों के मनोहर अंगों को रागसहित देखने का त्याग। 3.पूर्व काल में किये हुए विषय भोगों को स्मरण करने का त्याग। 4. काम उद्दीपन करने वाले पुष्टिकर व इन्द्रियों की लालसा उत्पन्न करने वाले रसों का त्याग। 5.शरीर के श्रृंगार युक्त करने का त्याग।
 32. अपरिग्रह व्रत की भावना पाँच - 1.स्पर्शन, 2.रसना, 3.घ्राण, 4.चक्षु, 5.कर्ण इन्द्रियों के स्पर्श आदि इष्ट-अनिष्ट विषयों में रागद्वेष के भाव का त्याग।
 33. समाधि मरण के पाँच प्रकार - 1.बाल-बाल मरण, 2.बाल मरण, 3.बाल पण्डित मरण, 4.पण्डित मरण, 5.पण्डित-पण्डित मरण।
 34. दर्शन मोहनीय बन्ध के पाँच कारण - 1.केवली का अवर्णवाद, 2.शास्त्र का अवर्णवाद, 3.संघ का अवर्णवाद,4.धर्म का अवर्णवाद, 5.देवों का अवर्णवाद।
 35. सम्यग्दर्शन के पाँच अतिचार - 1.शंका, 2.कांक्षा, 3.विचिकित्सा, 4.अन्यदृष्टि प्रशंसा, 5.अन्यदृष्टिसंस्तव।
 36. दिग्व्रत के पाँच अतिचार -  1.ऊर्ध्वव्यतिक्रम, 2.अधोव्यतिक्रम, 3.तिर्यग्व्यतिक्रम, 4.क्षेत्रवृद्धि, 5.स्मृत्यन्तराधान।
 37. देशव्रत के पाँच अतिचार - 1.आनयन, 2.प्रेष्यप्रयोग, 3.शब्दानुपात, 4.रूपानुपात,5.पुद्गलक्षेप।
 38. अनर्थदण्डत्याग व्रत के पाँच अतिचार - 1.कन्दर्प, 2.कौत्कुच्य, 3.मौखर्य 4.असमीक्ष्याधिकरण,5.उपभोगपरिभोगानर्थक्य।
 39. सामायिक व्रत के पाँच अतिचार -1.मनोदुःप्रणिधान, 2.वाग्दु:प्रणिधान, 3.कायदु:प्रणिधान, 4.अनादर, 5.स्मृत्यनुपस्थान।
 40. प्रोषधोपवास व्रत के पाँच अतिचार - 1.अप्रत्यवेक्षिताप्रमार्जितोत्सर्ग,2.अप्रत्यवेक्षिताप्रमार्जितादान, 3.अप्रत्यवेक्षिताप्रमार्जित संस्तरोपक्रमण, 4.अनादर, 5.स्मृत्युपस्थान।
 41. उपभोग परिभोग परिमाण व्रत के पाँच अतिचार - 1.सचित्ताहार, 2.सचित्त सम्बन्धाहार, 3.सचित्त, 4.अभिषवाहार, 5.दु:पक्वाहार।
 42. परोक्ष मुक्ति ज्ञान के पाँच भेद - 1.स्मृति, 2.प्रत्यभिज्ञान, 3.तर्क, 4.अनुमान, 5.आगम।
 43. अतिथि संविभाग व्रत के पाँच अतिचार - 1.सचित्तनिक्षेप, 2.सचित्तापिधान, 3.परव्यपदेश, 4.मात्सर्य, 5.कालातिक्रमण।
 44. विनय पाँच -  1.दर्शन विनय, 2.ज्ञान विनय, 3.चारित्र विनय, 4.तप विनय, 5.उपचार विनय ।
 45. अस्तिकाय पाँच - 1.जीव, 2.पुद्गल, 3.धर्म, 4.अधर्म, 5.आकाश।
 46. रस पाँच- 1.खट्टा, 2.मीठा, 3.कड़वा, 4. कषेला, 5.चरपरा।
 47. वर्ण पाँच - 1.काला, 2.पीला, 3.नीला, 4.सफेद, 5.लाल।
 48. भूत पाँच - 1.पृथ्वी, 2.जल, 3.अग्नि, 4.वायु, 5.आकाश। (अन्य मतियों के अनुसार)
 49. परावर्तन पाँच - 1.द्रव्य, 2.क्षेत्र, 3.काल, 4.भव, 5.भाव।
 50. दान पाँच - 1.दयादत्ति, 2.पात्रदत्ति, 3.समदत्ति, 4.अन्वयदत्ति, 5.सकलदत्ति।
 51. पाण्डव पाँच - 1.युधिष्ठिर, 2. भीम, 3.अर्जुन, 4.नकुल, 5.सहदेव।
 52. तीर्थंकर महावीर के बाद पाँच श्रुत केवली - 1.विश्वनन्दी, 2.नन्दीमित्र, 3.अपराजिता, 4.गोवर्धन, 5.भद्रबाहु।
 53. तीर्थंकर महावीर के बाद पाँच महामुनि - 1.नक्षत्र, 2.जयपाल, 3.पाण्डु, 4.ध्रुवसेन, 5.कंसाचार्य दशांग विद्या के पारगामी।
 54. तीर्थंकरों के पाँच कल्याणक - 1.गर्भ, 2.जन्म, 3.तप, 4.ज्ञान, 5.मोक्ष।
 55. कर्म इन्द्रियाँ पाँच - 1.पैर, 2.हाथ, 3.वचन, 4.गुदा, 5.उपस्था।
 56. ओम (ॐ) में पंच परमेष्ठी सूचक पाँच अक्षर हैं - 1. अ, 2. अ, 3. आ, 4. उ, 5. म।
 57. अ, सि, आ, उ, सा में पाँच अक्षर पंच परमेष्ठी सूचक हैं।
 58. अभक्ष्य के पाँच भेद -  1.बहुस्थावर हिंसाकारक, 2.त्रसहिंसाकारक, 3.प्रमादकारक (नशाकारक), 4.अनिष्टकारक, 5.अनुपसेव्य।
 59. नाम कर्म की जाति अथवा शरीर प्रकृतियाँ पाँच - 1.एकेन्द्रिय, 2.द्वीन्द्रिय, 3. इन्द्रिय, 4.चतुर्रिन्द्रिय, 5. पंचेन्द्रिय।
  60. नाम कर्म की बन्धन प्रकृतियाँ पाँच - 1.औदारिक बंधान, 2.वैक्रियिक बंधान, 3.आहारक बंधान, 4.तैजस बंधान, 5.कार्मण बंधान।
 61. पाँच संघात प्रकृतियाँ - 1. औदारिक संघात, 2.वैक्रियिक संघात, 3.आहारक संघात, 4.तैजस संघात, 5.कार्मण संघात।
 62. चारित्र के पाँच भेद - 1.सामायिक, 2.छेदोपस्थापना,3.परिहारविशुद्धि, 4.सूक्ष्म संपराय, 5.यथाख्यात।  
 63. अनऋद्धि प्राप्त आर्यों के पाँच भेद - 1.क्षेत्र आर्य, 2.जाति आर्य, 3.कर्म आर्य,4.चरित्र आर्य, 5.दर्शन आर्य।
 64. विवेक पाँच प्रकार - 1.इन्द्रिय विवेक, 2.कषाय विवेक, 3.उपाधि विवेक, 4.भक्तपान विवेक, 5.देह विवेक।
 65. जिस साधु ने पंडितमरण करने का दृढ़ निश्चय कर लिया है, उसको इन पाँच शुद्धियों को धारण करना चाहिए - 1.आलोचना शुद्धि, 2.शैया संस्तर शुद्धि, 3.उपकरण शुद्धि, 4.भक्त पान शुद्धि, 5.वैयावृत्य करण शुद्धि।
 66. निर्यापकाचार्य के अन्वेषण करने के लिए विहार करने वाले की विधि के पाँच प्रकार - 1.रात्रि प्रतिमा कुशल, 2.स्वाध्याय कुशल, 3.प्रश्न कुशल,4.स्थडिलशायी, 5.आसक्ति रहित।
 67. तीर्थंकर की प्रथम पारणा के दिन आहारदाता के यहाँ नियम से पँच आश्चर्य होते हैं - 1.रत्न दृष्टि 125000000 उत्कृष्ट व (1,25,000) जघन्य, 2.देव दुन्दुभि, 3.दिव्य पुष्पों की आवृत्ति, 4.जय-जय का उद्घोष, 5.शीतल सुगन्धित वायु का बहना।
 68. केवलज्ञान होते ही तीर्थंकर का शरीर 5,000 धनुष प्रमाण ऊर्ध्व गमन करता है।
 69. कुन्दकुन्द आचार्य गुरू की परम्परा पाँच -1.भद्रबाहु, 2.गुप्तिगुप्त, 3. माघनन्दी, 4.जिनचन्द्र, 5.कुन्दकुन्द।
 70. केवल एक भव अवतार लेकर मोक्ष जाने वाले एक भवातारी पाँच - 1.पाँचवे स्वर्ग के लोकान्तिक देव, 2.दक्षिणेन्द्र, 3.इन्द्र की शचि, 4.लोकपाल, 5.पाँच अनुत्तर विमानों के देव।
 71. समवाय पाँच - 1.स्वभाव, 2.पुरूषार्थ,3.काललब्धि, 4.भवितव्य, 5.निमित्त।
 72. धर्म के पाँच अंग निम्न हैं - 1.णमोकार मन्त्र जैसा मन्त्र नहीं। 2.वीतरागी जैसे देव नहीं। 3.निर्ग्रन्थ जैसे गुरु नहीं। 4.अहिंसा जैसा धर्म नहीं। 5.आत्मध्यान जैसा ध्यान नहीं।
 73. जैन धर्म की पाँच विशेषतायें हैं - 1.जैन धर्म भौतिक सम्पदा का प्रलोभन नहीं देता है। 2.जैन धर्म अवतारवाद को नहीं मानता है। 3.जैन धर्म अतिशय को नहीं मानता है। 4.जैन धर्म चमत्कार को भी नहीं मानता है। 5.जैन धर्म कर्तावाद को नहीं मानता है।
 74. दाता के पाँच दूषण - 1.विलम्ब से देना, 2.विमुख होकर देना, 3.दुर्वचन, 4.निरादर, 5.देकर पश्चात्ताप करना।
 75. निद्रा के पाँच भेद - 1.निद्रा, 2.निद्रा-निद्रा, 3.प्रचला, 4.प्रचला-प्रचला, 5.स्त्यानगृद्धि।
 76. अन्य दर्शन का स्वरूप - 1.न्याय वैशेषिक केवल नैगम नय के, 2.अद्वैतवादी और सांख्य केवल संग्रह नय के, 3.चार्वाक लोग केवल व्यवहार नय के, 4.बौद्ध लोग केवल ऋजु सूत्र नय के, 5.वैयाकरण केवल शब्द नय के।
 77. मन के द्वारा परिणाम परिवर्तित होते हैं, उसकी पाँच भूमिकायें हैं - 1.क्षिप्त, 2.विक्षिप्त, 3.मूढ़, 4.चित्त निरोध, 5.एकाग्रता। उपरोक्त भूमिकाओं में मन घूमता रहता।
 78. लब्धअपर्याप्तक के भवों की संख्या - एक इन्द्रिय में 66132 भव + दो इन्द्रिय में 80 भव+तीन इन्द्रिय में 60 भव+चार इन्द्रिय में 40 भव+पाँच इन्द्रिय में 24 भव=कुल योग66336 भव।
 79. पाँच सूना - 1.बुहारी देना, 2.अग्नि जलाना, 3.जल भरना, 4.कूटना, 5.पीसना।
 80. पैंतालीस लाख योजन विस्तार है - 1.सीमान्तक इन्द्रक बिल (प्रथम नरक), 2.ढाई द्वीप, 3.प्रथम स्वर्ग का ऋजुनामा विमान, 4.सिद्ध शिला, 5.सिद्ध क्षेत्र।
 81. जीव के साथ संबंधित मुख्य वर्गणायें पाँच प्रकार की हैं - 1.आहार वर्गणा, 2.भाषा वर्गणा, 3.मनो वर्गणा, 4.तैजस वर्गणा, 5.कार्मण वर्गणा।
 82. अर्थ व्यंजन योग संक्रान्ति - 1.अर्थ नाम ध्यान करने योग्य द्रव्य व पर्याय का है। 2.व्यंजन नाम वचन का है। 3.योग नाम काय, वचन, मन की क्रिया का है। 4.संक्रान्ति नाम पलटने का है। 5.इनमें जो द्रव्य को छोड़ उसकी पर्याय को ध्याता है तथा पर्याय को छोड़कर द्रव्य को ध्याता है तो अर्थ संक्रान्ति है।
 83. मोक्ष पाँच प्रकार का होता है - 1.शक्ति मोक्ष, 2.दृष्टि मोक्ष, 3.मोह मोक्ष, 4.जीवन मोक्ष, 5.विदेह मोक्ष।
 84. साधु की पाँच प्रकार की आहार चर्या - 1.भ्रामरी, 2.गर्त्तपूरणी, 3.उदराग्नि प्रशमन, 4.अक्षमृक्षणी, 5.गोचरी।
 85. साध्वाभास के 5 भेद - 1.पार्श्वस्थ, 2.संस्कृत, 3 अवसन्न, 4.मृगचारी, 5.कुशील।
 86. निमित्त नैमित्तिक व कालिक क्रियाओं के भेद - 1.दैनिक, 2.रात्रिक, 3.पाक्षिकी, 4.चातुर्मासकी, 5.वार्षिकी।
 87. रंग, रूप, रुपया, राग और रसना - इन पाँच 'र' में लिप्तता संसार बढ़ाने का कारण हैं।
 88. अजीव द्रव्य पाँच - 1.पुद्गल, 2.धर्म, 3.अधर्म, 4.आकाश, 5.काल।
 89. अमूर्तिक द्रव्य - 1.जीव, 2.धर्म, 3.अधर्म, 4.आकाश, 5.काल।
 90. (इज्या) देव पूजा - 1.नित्यमह, 2.चतुर्मुख, 3.कल्पद्रुम, 4.अष्टान्हिका, 5.इन्द्रध्वज।
 91. ज्ञानावरण कर्म की प्रकृतियाँ - 1.मतिज्ञानावरण, 2.श्रुतज्ञानावरण, 3.अवधिज्ञानावरण,4.मन:पर्ययज्ञानावरण, 5.केवलज्ञानावरण।
 92. पिंडस्थ ध्यान की धारा पाँच - 1.पृथ्वी धारणा, 2.अग्नि धारणा, 3.पावन धारणा, 4.जल धारणा, 5.तत्त्वरूपवती धारणा।
 93. ब्रह्मचारी के पाँच भेद - 1.उपनय, 2.अवलम्ब, 3.अदीक्षा, 4.गूढ, 5.नैष्ठिक।
 94. द्विदल दोष के पाँच भेद - 1.अन्न द्विदल, 2.काष्ठ, 3.हरी, 4.शिखरनी, 5.काँजी।
 95. उत्तम भावना - 1.तपोभावना, 2.श्रुतभावना, 3.सत्यभावना, 4.एकत्व भावना, 5.धृतिबल भावना।
 96. संक्लिष्ट (कुत्सित) भावना के पाँच भेद - 1.कंदर्पी, 2.कैल्विषी, 3.अभियोगिकी, 4.आसुरी, 5.संमोही।
 97. माया के पाँच भेद - 1.निवृत्ति, 2.उपधि, 3.सातिप्रयोग, 4.प्रणिधि, 5.प्रतिकुंचन।
 98. विनय के पाँच भेद - 1.लोकानुवृत्ति, 2.अर्थनिमित्तक, 3.कामतन्त्र, 4.भय, 5.मोक्ष।
 99. तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि पाँच - 1.कैलाशपर्वत, 2.गिरनार, 3.चम्पापुर, 4.पावापुर, 5.सम्मेदशिखर।
 100. पूजा के अंग - 1.आह्वानन, 2.स्थापना, 3.सन्निधिकरण 4. पूजन, 5.विसर्जन।
 101. महावीर के पाँच नाम - 1.वर्धमान, 2.वीर, 3.अतिवीर, 4.सन्मति, 5.महावीर।
 102, क्षुल्लक के पाँच भेद - 1.वानप्रस्थ क्षुल्लक,2. नैष्ठिक क्षुल्लक, 3.गूढ़ क्षुल्लक, 4.वर्णी, 5.साधक क्षुल्लक।
 103. पाँच अणुव्रत में प्रसिद्ध - 1.अहिंसाणुव्रत- मातंग।2.सत्याणुव्रत - धनदेव। 3.अचौर्य व्रत - वारिषेण। 4.ब्रह्मचर्य व्रत - नीलीबाई। 5.परिग्रह परिमाण व्रत - जयकुमार सेनापति।
 104. पाँच पापों में प्रसिद्ध - 1.हिंसा में - धनश्री। 2.झूठ में - सत्यघोष। 3.चोरी में - तापस। 4.कुशील में - यमपाल। 5.परिग्रह में - श्मश्रु नवनीत ब्राम्हण।
 105. पांच मिथ्यात्वों में प्रसिद्ध - 1.विपरीत मिथ्यात्व में - याज्ञिक ब्राह्मण। 2.एकान्त मिथ्यात्व मे - घोष। 3.विनय मिथ्यात्व में - शैव तापस। 4.संशय मिथ्यात्व में - श्वेताम्बर मुँहपट्टी वाले। 5.अज्ञान मिथ्यात्व में - मस्करी नाम (मुस्लिम)।
 106. प्राकृत भाषा के पाँच भेद - 1.मागधी, 2.अर्धमागधी, 3.शौरसैनी, 4.पैशाची, 5.चूलिका।
 107. पाँच समझने योग्य बातें - 1.मिथ्यात्व का  वमन, 2.सम्यक्त्व का उत्पन्न, 3.कषायों का शमन, 4.इन्द्रियों का दमन, 5.आत्मानुभव।
 108. पाँच त्याग्ने योग्य बातें -
 1. (ककार) -  1.कीर्ति, 2.कंचन, 3. कामिनी, 4. कुटुम्ब, 5. करिश्मा।
 2. (पकार) - 1. प्रदर्शन, 2.प्रतिष्ठा, 3.प्रतिस्पर्धा, 4.पाप, 5.पैशून्य।
 3. (मकार) - 1.मंच, 2.माला, 3.माईक, 4.मान,5.माया।
 109. पाँच ग्रहण करने योग्य बातें - 1.सम्यक्त्व, 2.श्रुत, 3.समता, 4.शान्ति, 5.सुख।

 

Jinshaasanashtak

    "जिनशासनाष्टक" रत्नात्रयमय जिनशासन ही महावीर का शासन है। क्या चिंता अध्रुव की तुझको, ध्रुव तेरा सिंहासन है ।।टेक॥ द्रव्यदृष्टि...