Saturday, March 20, 2021

Jinshaasanashtak

 

 "जिनशासनाष्टक"


रत्नात्रयमय जिनशासन ही
महावीर का शासन है।
क्या चिंता अध्रुव की तुझको,
ध्रुव तेरा सिंहासन है ।।टेक॥

द्रव्यदृष्टि से निज को देखे,
स्वयं स्वयं में तृप्ति हो।
भेद विज्ञान सहज ही वर्ते,
किंचित नहीं आसक्ति हो।
उदभुत समता हो जीवन में,
तत्वों का प्रतिभासन है ॥  रत्नात्रयमय....

आविर्भूत सामान्य हुआ है,
तिरोभूत हैं सर्व विशेष ।
सम्यक् हो परिणमन सहज ही,
राग-द्वेष हुए निःशेष ।
शासक कोई अन्य नहीं है,
सहजरुप अनुशासन है।।  रत्नात्रयमय....

परम अहिंसा सहज प्रवर्ते,
हिंसा का नहीं कोई काम।
निवृत्तिमय परिणति शोभे,
पर वृत्ति का नहीं कुछ नाम।
अहो-अलौकिक प्रभुता विलसे,
हो विभाव का नाशन है॥  रत्नात्रयमय....

सम्यकदर्शन मूल अहो,
चारित्र वृक्ष पल्लवित हुआ।
ज्ञान ज्ञान में भासे क्षण-क्षण,
दशलक्षण से फलित हुआ।
है निश्चिंत द्रोपदी सुखमय,
नहीं कोई दुशासन है॥  रत्नात्रयमय...

सत्य अहिंसा प्राण हमारे,
तत्वज्ञान का धुव आधार ।
जिनभक्ति हो सदा हृदय में,
मुक्तिमार्ग का हो विस्तार।
सहज निशंक सहज निर्भय है,
मिला हमें जिनशासन है।।  रत्नात्रयमय...

ध्रुवदृष्टी प्रगटी अंतर में,
मोह महातम नशा है ।
ज्ञेय मूडता मिटी सहज ही,
ज्ञायक ही प्रतिभासा है।
भक्तिभाव से होय वंदना,
व्यक्त नमोऽसु शासन है।।  रत्नात्रयमय....

सपने में भी नहिं विराधना,
और मलिनता हो पाये।
घोर परीषह उपसर्गों में,
चित्त नहीं चिगने पावे।
सावधान होवें अपने में,
अप्रमत्त यह शासन है।।  रत्नात्रयमय....

इष्ट- अनिष्ट न कुछ भी भासे,
किचित नहीं विसमता हो।
ज्ञायक से संतुष्टि होवे,
ज्ञेयों में नहीं ममता हो।
ज्ञानमयी वैराग्यमयी,
आनंदमयी ये शासन है॥  रत्नात्रयमय....

***बा.ब्र.पं. रवीन्द्र जी 'आत्मन' अमायन***

Thursday, March 4, 2021

Shri Digambar Jain Temple Humdar Della, Ghogha

श्री दिगम्बर जैन मन्दिर हुम्मड़ डेला, घोघा

इस स्थान पर एक समय में एक बड़ी जैन आबादी थी। यह जगह समुद्र के किनारे स्थित है। यह पहले के दिनों (लगभग -200 साल पहले) में एक प्रसिद्ध बंदरगाह हुआ करता था और लगभग 1200 जैन परिवार उस गाँव में रहे थे। लेकिन प्लेग के कारण सभी परिवार इस क्षेत्र से चले गए। अब किसी भी जैन परिवार से संबंधित एक भी घर नहीं है। हालांकि, मौजूदा जैन मंदिर का संपर्क कार्य भावनगर दिगंबर जैन समाज, भावनगर द्वारा किया गया है।  भावनगर के कई दिगंबर जैन परिवार मूल रूप से घोघा के हैं।

1. दिगंबर जैन मंदिर में 4 वीं शताब्दी की बहुत पुरानी मूर्ति मुलनायक चंद्रप्रभु भगवान की है। इस मंदिर को चोपड़ा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान नेमिनाथ की चमत्कारी मूरति भी यहाँ स्थापित हैं. 

2. दूसरा गुजराती मंदिर भगवान आदिनाथ का है क्योंकि यह मुलनायक (15 वीं शताब्दी में स्थापित) है। यह प्राचीन मूर्ति 2500 वर्ष से अधिक पुरानी है और शिलालेख और प्रतीक के बिना है। इस मंदिर में 15 वीं शताब्दी में स्थापित एक सुंदर धातु 'सहस्त्र कुट' चैत्यालय (उस पर उत्कीर्ण 1008 मूर्तियाँ) हैं। 

3. तीसरे मंदिर में,  पद्मासना मुद्रा में एक बहुत ही सुंदर सफेद मूर्ति है जिसमें मूलनायक  भगवान आदिनाथ की मूरति है जिन्हें Dandia मंदिर कहा जाता है। सभी मंदिर मुख्य शहर घोघा में हैं

Map

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र
श्री शत्रुजय - पालीताणा - 60 कि.मी.,
गिरनारजी - 210 कि.मी.

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - भावनगर - 20 कि.मी.
बस स्टेण्ड - भावनगर - 20 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - बस द्वारा
निकटतम प्रमुख नगर - भावनगर - 20 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - X, कमरे (बिना बाथरूम) - 2 हाल - X, गेस्ट हाउस - X
यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 30.
भोजनशाला - श्वेताम्बर जैन समाज की है । नियमित, सशुल्क
औषधालय - है (ऐलोपैथी)
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - है  

अतिशय क्षेत्र घोघा
नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन मन्दिर हुम्मड़ डेला, घोघा
पोस्ट - घोघा, जिला - भावनगर (गुजरात) पिन -- 364 110
टेलीफोन - ट्रस्टी-कुँवर भाई, भावनगर - 094262 05163

Wednesday, February 24, 2021

Atishay Kshetr Ajayagadh Madhya Pradesh

 श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़,पन्ना (मध्यप्रदेश)
Shri Digambar Jain Atishay Area, Ajaygarh, Panna (Madhya Pradesh) 


 अजयगढ़ मप्र के पन्ना जिले से 32 किमी दूर स्थित है। यह खजुराहो से चार घंटे की ड्राइव भी है, लेकिन सड़कें बहुत खराब और उबड़-खाबड़ हैं। जयपाल पहाड़ी की चोटी पर बना मंदिर 9 वीं शताब्दी में चंदेल वंश द्वारा बनाया गया था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब यह मंदिर अपनी महिमा खो चुका है। पेड़ हर तरफ बढ़ने लगे हैं और किला अपनी उम्र से काफी पुराना लगता है। किले के मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सौ से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

मंदिर के अंदर तीर्थंकर शांतिनाथ की 12 फीट ऊंची मूर्ति है। इसके साथ ही, भगवान कुंथुनाथ और अरनाथ की मूर्तियाँ भी हैं। यहां एक सहस्त्रकूट जिनालय भी बनाया गया है। सभी में बिखरी हुई जैन मूर्तियों के टूटे हुए टुकड़े देख सकते हैं। यह स्थान अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और उन्होंने यहां की जा रही पूजा को रोक दिया है, केवल दर्शन की अनुमति है। दो मंदिरों का निर्माण कार्य चल रहा है। 

Map


आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - सतना - 100 कि.मी.
बसस्टेण्ड पहुँचने का सरलतम मार्ग - अजयगढ़ पन्ना अथवा बाँदा से सड़क मार्ग द्वारा
निकटतम प्रमुख नगर - पन्ना - 32 कि.मी.

 
प्रबन्ध व्यवस्था
संस्था - दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी, अजयगढ़
अध्यक्ष - श्री राजकुमारजी जैन (09981091591)
मंत्री - श्री कोमलचन्द जैन (09179320609) श्री सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498)
प्रबन्धक - सिंघई महेन्द्रकुमार जैन (07730 - 278498) 

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
खजुराहो-50 कि.मी.,
द्रोणागिरि, नैनागिरि,
श्रेयांसगिरि-100 कि.मी.,
चित्रकूट - 100 कि.मी.,
कालिंजर-30 कि.मी.

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - नहीं
भोजनशाला - नहीं
औषधालय - है (शासकीय)
पुस्तकालय - नहीं
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - है।

नाम एवं पता -
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, अजयगढ़, पोस्ट/तहसील - अजयगढ़,
जिला - पन्ना (मध्यप्रदेश) पिन - 488220
टेलीफोन - 07730 - 278244, मो.: 094250-25925

Tuesday, February 23, 2021

Bundelkhand's Jain Tirth

बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी (टीकमगढ़) मध्य प्रदेश

Bundelkhand's Jain Tirth - Shri Digambar Jain Sidhha Aharji, Tikamgarh (M.P.)

आज से लगभग 133 वर्ष पूर्व सन 1884 (वि.सं. 1941) तक अहार जी क्षेत्र एक विशाल रेत के टीले में तब्दील था। टीकमगढ़ जिले के नारायणपुर ग्राम के एक जैन व्यापारी श्री सबदल बजाज जी का घोड़ा खो गया था,जिसे खोजते हुये बे उस टीले पर पहुंचे। टीले पर खड़े होकर घो‌ड़े के लिये चारों ओर नजर दौड़ाई, तभी बहां उन्होने कुछ बच्चों को खेलते हुये देखा। उन से घोड़े के बारे में पूंछा। वहा टीले पर बच्चे रेत का खेल खेल रहे थे। वहा  पर कुछ छेद (छिद्र)बने हुये थे, जिनमें बच्चे आवाज लगाते और उन्हें बदले में प्रतिध्वनि सुनाई देती। श्री बजाज जी ने भी ऐसा करके देखा और उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि इसके नीचे कुछ विशेष रचना मंदिर या मठ आदि हो सकता है। वे पास के ग्राम पठा गये और वहां पर जैन विद्वान पं. भगवानदास जी वैद्य से इस बारे में चर्चा की। कुछ समय बाद दौनों लोग पुन: टीले पर आये और स्थिति का जायजा लिया।
दोनों महानुभावों ने मजदूरों को लेकर खुदाई प्रारम्भ कराईतो कुछ ही दूरी पर मंदिर का दरवाजा मिल गया। भीतर जाकर देखा तो भगवान शांतिनाथ एवं भगवान श्री कुंथुनाथ जी की दो खड़्गाीसन खण्डित प्रतिमायें खड़ी थीं। पुन: खुदाई प्रारम्भ हुई और एक विशाल मंदिर जो कि रेत के टीले में दबा हुआ था, धीरे धीरे प्रकट हो गया। क्षेत्र के दक्षिण दिशा में स्थित पर्वत पर सैकड़ों मूर्तियां खण्डित अवस्था में पड़ी हुई थींजिन्हें एकत्रित करके संग्रहालय में लाया गया। अहार क्षेत्र के इस संग्रहालय में ग्यारहवीं शताब्दी से पंद्रहवीं शताब्दी तक की सैकड़ों मूर्तियां विद्यमान हैं। 
प्रसिद्ध क्षेत्र आहार जी सिद्ध क्षेत्र के साथ अतिशय क्षेत्र भी है, यहां पाणाशाह नामक प्रसिद्ध सृष्टि प्रवर के रांगा से भ्ररे बोरे चांदी में परिवर्तित हो गये थे। जब एक माह की व्रत के बाद, एक तपस्वी संत को यहां एक यक्षिणी द्वारा उपसर्ग किये जाने पर आहार (भोजन) मिला तभी से इस जगह का नाम आहारजी के रूप में प्रसिद्ध हो गया ! काफी इतने सारे लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं। पूर्व में यहां के शासक मदन बर्मनदेव के होने से उन्हीं के नाम से मदन सागर सरोवर वर्तमान में स्थित है।
सिद्ध क्षेत्र आहार जी में मूलनायक शांतिनाथ भगवान का मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में देशी पाषाण की अखंडशिला से निर्मित भगवान शांतिनाथ की अत्यंत मनोहारी परम आभामंडल से संपन्न 21 फुट की कलात्मक प्रतिमा विराजमान है।  भगवान कुंथुनाथ की लम्बाई 11 फीट है तथा अरहनाथ की नवीन मूर्ति जो 1958 के गजरथ में स्थापित की गयी थी बह भी 11 फीट (सफेद संगमरमर) की है। शांतिनाथ तथा कुंथुनाथ की प्रतिमाओंपर रत्नों की पालिश है। 
 
Map
 
 
क्षेत्र पर संख्या
मन्दिरों की संख्या - 08, 
मानस्तम्भ-2, 
चरणछतरी-6 (पंचपहाड़ी पर)
 
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - 
पपौराजी - 22 कि.मी., द्रोणगिरि - 56 कि.मी., खजुराहो - 125 कि.मी., श्री फलहौड़ी - बड़ागाँव-30 कि.मी., ओरछा-110 कि.मी., कुंडेश्वर - 30 कि.मी.
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास - 
कमरे (अटैच बाथरूम) - 22, 
कमरे (बिना बाथरूम) - 150 
हाल - 3 (यात्री क्षमता - 200), 
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000. 
ए.सी.कमरे-02 , डीलक्स कमरे-14
भोजनशाला - सशुल्क, अनुरोध पर
औषधालय - है (आयुर्वेदिक)
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - है (संस्कृत विद्यालय, एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। छात्रावास, व्रती आश्रम)

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - मऊरानीपुर-62 कि.मी., ललितपुर-83 कि.मी., झाँसी-120 कि.मी.
बस स्टेण्ड - बलदेवगढ़ - 10 कि.मी., टीकमगढ़ - 25 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग टीकमगढ़ से अहारजी
निकटतम प्रमुख नगर - टीकमगढ़ - 25 कि.मी.


नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, अहारजी तहसील - बल्देवगढ़, 
जिला - टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) पिन - 472 001
टेलीफोन - 07683-298932, 09926610184, 
नरेन्द्रकुमार जैन-09425141593 
 
यह भी पढ़ें-

1. Gomatgiri        
2. Maksi              
3. Pushpgiri
4. Sidwarkut
5. Atishay
6. Kaunch



Monday, February 22, 2021

Banediyaji jain mandir indore

 अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश


जी हा दोस्तो क्या आप ने सुना है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर के बारे में तो सही सुना है कहा जाता है की यह उड़ता हुआ आया था. पूरे भारत में शायद ही ऐसा मंदिर होगा जो उड़ कर आया होगा यह एक मात्र मंदिर है बनेडिया जी का जिसकी कोई नीब नही है. इससे यह प्रमाणित होता है की मंदिर सही में उड़ केर आया था.
यह मंदिर  इंदौर से मात्र 40 km और  देपालपुर से 4 km पर है बनेडिया दिगम्बर जैन मंदिर ।

श्री बनडियाजी अथियाक्षेत्र लगभग आठ सौ वर्ष पुराना है। यह एक विशाल तालाब के किनारे पर स्थित है। तालाब का एक सिरा देपालपुर को छूता है। यह माना जाता है कि अतीत में देपालपुर से बनाडिया तक फैला एक बड़ा शहर रहा होगा। मूलनायक प्रतिमा भगवान अजितनाथ की अति प्राचीन, अतिशय युक्त व मनोमुग्धकारी है। मंदिर में सैकड़ों प्राचीन प्रतिमाएँ विराजमानहैं। किंवदन्ती है कि इस जैन मन्दिर को महात्माओं द्वारा आकाश मार्ग से पृथ्वी पर उतारा गया है।

इस मंदिर के बारे में लोकप्रिय बात यह है कि इस मंदिर की कोई नींव नहीं है और अभी भी यह सैकड़ों वर्षों से यहां खड़ा है और कई प्राकृतिक आपदाओं को झेल चुका है। यह एकमात्र आतिशाक्षेत्र है, जहां मंदिर भारत में नींव के बिना है। भगवान अजितनाथ की मूर्ति से संबंधित चमत्कारों के बारे में कई लोकप्रिय कहानियां हैं। केवल जैन ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के हजारों लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करने आते हैं। वार्षिक मेले के अवसर पर हजारों की संख्या में पुरुष और महिलाएँ यहाँ इकट्ठा होते हैं और बड़ी धार्मिक श्रद्धा और भक्ति दिखाते हैं। 

Map

 

विशेष जानकारी :
देपालपुर-बनेड़िया जंक्शन पर श्री दि. जैन सोशल ग्रुप, इन्दौर नगर व ट्रस्ट के सहयोग से विशाल अजितनाथ द्वार यात्रियों की जानकारी हेतु निर्मित किया गया है।
समीपवर्तीतीर्थक्षेत्र गोम्मटगिरि - 30 कि.मी.,
सिद्धवरकूट - 125 कि.मी.
मक्सीजी - 95 कि.मी.,
सूमठा -8 कि.मी.

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - गौतमपुरा रोड़ - 21 कि.मी., इन्दौर - 45 कि.मी.
बस स्टेण्ड - देपालपुर से बनेड़ियाजी - 4 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर से बनेड़िया सड़क मार्ग, उज्जैन, धार, गौतमपुरा से सड़क मार्ग, बस, टेम्पो, जीप सुविधा उपलब्ध
निकटतम प्रमुख नगर - इन्दौर - 45 कि.मी., देपालपुर - 4 कि.मी. 

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 10, कमरे
(बिना बाथरूम) - 20 (
6 सुसज्जित डीलक्स कमरे)
हाल - 1 (यात्री क्षमता - 100+25),
गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 300.
भोजनशाला - नियमित, सशुल्क
अन्य - संतसदन
औषधालय -   है |
पुस्तकालय - पुस्तके - 200
विद्यालय - नहीं
एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। 

अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी मध्यप्रदेश
नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, बनेड़ियाजी ग्राम - बनेड़िया,
तहसील - देपालपुर, जिला - इन्दौर (मध्यप्रदेश) पिन - 453115
टेलीफोन - 098937-13839 

यह भी पढ़ें-

1. Gomatgiri        
2. Maksi              
3. Pushpgiri
4. Sidwarkut
5. Atishay
6. Kaunch

Sunday, February 21, 2021

Manatungagiri Tirthakshetra - श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा, धार (मध्यप्रदेश)

 


भारत भूमि पर एक ऐसा अतिशय तीर्थ क्षेत्र है जो कि जैन दर्शन के भक्तामर स्त्रोत की रचना स्थली के स्मृति रूप मानतुंगगिरी के नाम से जाना जाता है. मानतुंगगिरी यथानाम एक ऊंची पहाड़ी पर ऐसे शांत परिवेश में निर्मित है जहां पहुंचकर भगवान आदिनाथ की विशालतम खड्गासन  प्रतिमा एवं मानतुंगचार्य की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन मात्र से हृदय को सहज ही अवर्णनीय आनंद की अनुभूति होती है. 

इस जगह की एक बहुत ही प्रचलित कथा है. कहा जाता है उस समय मालवा की भूमि पर धार नगरी में राजा भोज का राज्य था.  राजा ने किसी आवेश में आकर आचार्य मानतुंग स्वामी को ४८ कोठरियों में (बन्दीगृह में) बन्द कर दिया था. तब आचार्य ने भगवान आदिनाथ की अटूट भक्ति की और ४८ काव्यों की रचना की जिसके फलसरूप उस बन्दीगृह के ४८ ताले स्वयमेव टूट गए, भक्ति का ऐसा अदभुत चमत्कार देखकर राजा भोज को भी मुनिराज के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा। यह स्तोत्र आज भक्तामर स्तोत्र के नाम प्रसिद्ध हुआ है।

धार (मध्य प्रदेश) से मात्र 3 KM दूर इंदौर एवं अहमदाबाद पर एक पावन स्थल जोकि अतिशय तीर्थ क्षेत्र मानतुंगगिरी के नाम से विश्व प्रसिद्ध है. भक्तामर काव्यों की रचना स्थली के स्मृति रूप एकमात्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र जो की समादिस्थ गुजरात संत श्री परम पूज्य आचार्य श्री भरत सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से विकास गति की ओर अग्रसर है. आचार्य श्री कि आचार्य दीक्षा स्थली की स्मृति रूप यह क्षेत्र हे. गुरुदेव वात्सल्य शिरोमणि रहे मानवकुंज रहे हो आज आपके और हमारे बीच नहीं हैं उसके बावजूद यहा जा काम प्रगति पर है. आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज की प्रेरणा से यहां काम आगे बाद रहा है. 

Map

  

 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ  
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 12,(बिना बाथरूम) - 7 हाल -1, गेस्ट हाउस - ४ यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 100.
भोजनशाला - है सशुल्क, अनुरोध पर - संत सदन एवं प्रवचन हॉल
औषधालय - निर्माणाधीन
पुस्तकालय - है।
विद्यालय - नहीं ।
एस.टी.डी./पी.सी.ओ. - नहीं

आवागमन के साधन
रेल्वे स्टेशन - इन्दौर-67 कि.मी., रतलाम-80 कि.मी., मेघनगर -110 कि.मी.
बस स्टेण्ड - धार - 3 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - इन्दौर - अहमदाबाद तिरला रोड़ (आमखेड़ा), धार से बसें उपलबध रहती हैं।
निकटतम प्रमुख नगर - धार - 3 कि.मी.

क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या :
3-पूर्ण विकसित मार्बलीकरण एवं कांच का कार्य
क्षेत्र पर पहाड़ : है। 108 सीढ़ियाँ है।

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -
चमत्कारिक क्षेत्र आहूजी - 13 कि.मी.,
बावनगजा - 110 कि.मी.,
गोम्मटगिरि-64 कि.मी.,
बनेड़िया-70 कि.मी.,
अतिशय क्षेत्र-कागदीपुरा-22 कि.मी.

अन्य दर्शनीय एवं एतिहासिक स्थल
धार किला,
भोजशाला,
फड़के स्टूडियो,
पुरातत्त्व संग्रहालय,
दि. जैन शांतिनाथ मंदिर,
मोहनखेड़ा (श्वे.जैन) तीर्थक्षेत्र (राजगढ़) - 45 कि.मी.
  

नाम एवं पता
श्री दिगम्बर जैन मानतुंगगिरि तीर्थक्षेत्र, आमखेड़ा
जिला - धार (मध्यप्रदेश) पिन - 454001
टेलीफोन - 07292 - 233400, 09424580671


यह भी पढ़ें-

1. Gomatgiri        
2. Maksi              
3. Pushpgiri
4. Sidwarkut
5. Atishay
6. Kaunch


Wednesday, February 17, 2021

Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore

 Kauch Mandir- Digamber Jain Temple Indore


इंदौर मध्य प्रदेश का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है और दिगंबर जैनियों का मुख्य केंद्र भी है। शहर में कई जैन संस्थान और मंदिर हैं। 

कांच मंदिर, प्रसिद्ध जैन मंदिर में से एक मंदिर है. इसे सेठ हुकुमचंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | यह मंदिर सर सेठ हुकुमचंद द्वारा बनवाया गया था | श्री विक्रम सवंत १९७८ मिति आषाढ़ सुदी ७ सोमवार सन १९२१ में इसमें मूर्ति स्थापना कि गयी | ये मंदिर न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं, बल्कि उनकी वास्तुकला, बनावट और सुंदरता के लिए भी जाने जाता हैं।

यह मंदिर सफेद पत्‍थर से बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण हवेली के रूप में किया गया था. इसे कांच का मंदिर इस लिए कहा जाता है क्योकि मंदिर का अंदरूनी हिस्‍सा पूरी तरह कांच के दर्पण और टुकड़े की नकाशी से निर्मित किया है। मंदिर के अंदर हर जगह जैसे दीवारें, छत, फर्श, खंभे और दरवाज़े पूरी तरह से कांच से जड़े हैं। 

Map

इस मंदिर में एक विशेष ग्लास कक्ष है. इस मंदिर में तीन मूर्तियाँ स्थापित हैं, मध्य में श्री शांतिनाथ भगवान व उनके दाहिने हाथ कि और श्री चंद्रप्रभा भगवान एवं बायीं और आदिनाथ भगवान विराजे है. जो इन मूर्तियों की छवियों को अनिश्चित संख्या में गुणा करती हैं। इस मंदिर में जो कांच के दर्पण और रंग बिरंगे टुकड़े की नकाशी है, और उससे बने सुंदर चित्रों को देखने के लिए पर्यटक दूर दूर से यहां आते हैं। इसके दरवाजे लकड़ी के बने हुए है और उस पर चाँदी कि परत लगाई गयी है | इनकी दीवारों पर की गयी कांच की नक्काशी में जैन धर्म कि कहानिया और तीर्थ स्थल के दृश्य बनाये गये है. जो मंदिर के अंदरूनी हिस्से को शानदार बनता है.

यह मंदिर सिटी के मध्य में होने की वजह से यहा सभी जैन त्योहार बहुत धूम धाम से बनाया जाता है.  जब त्योहार होते है तो यह पर विधान होता है, सुगंध दशमी के दिन, विशेष मंडलों का निर्माण बहुरंगी चावल-पाउडर का उपयोग करके किया जाता है, रंग रंग कार्यक्रम होते है. त्योहारों पर जैन धर्म का महत्व भी समझाय जाता है युवा पीढ़ी को.


मंदिर सुबह १० बजे से शाम ५ बजे तक यह मंदिर आम जनता के लिए खुला रहता है |

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - इन्दौर - 3 km.
बस स्टेण्ड - इन्दौर - 3.3 km.
एयरपोर्ट - इन्दौर - 8.6 km

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र

मानतुंगगिरि-13 कि.मी.,
बनेड़िया-75 कि.मी.,
बावनगजा (चूलगिरि)-122 कि.मी.
कागदीपुरा-38 कि.मी.,
आहू - 65 कि.मी
गोमटगिरि - 12 कि.मी
पुष्पगिरी - 65 कि.मी
मक्सी - 72 कि.मी

तीर्थ स्थान का विवरण

कांच मंदिर,
इटवरिया बाजार,
हुकुमचंद मार्ग,
इंदौर, मध्य प्रदेश
452002

यह भी पढ़ें-

1. Gomatgiri        
2. Maksi              
3. Pushpgiri
4. Sidwarkut
5. Atishay

 




Jinshaasanashtak

    "जिनशासनाष्टक" रत्नात्रयमय जिनशासन ही महावीर का शासन है। क्या चिंता अध्रुव की तुझको, ध्रुव तेरा सिंहासन है ।।टेक॥ द्रव्यदृष्टि...